कश्मीर में गढ़वाल राइफल के जवानों पर केस दर्ज, पत्थरबाजों की आड़ में घटिया राजनीति !
Jan 31 2018 10:21AM, Writer:कपिल
एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। कश्मीर में गढ़वाल राइफल के जवानों पर केस दर्ज किया गया है। जो पत्थरबाज कश्मीर को बीते दशक से जलाते आ रहे हैं, जिन पत्थरबाजों पर पाकिस्तान के आंतकी संगठनों की सरपरस्ती है, जिन पत्थरबाजों ने बार बार भारतीय सेना के सामने मुसीबतें खड़ी की हैं, उन्ही पत्थरबाजों की आड़ में कश्मीर की सियासत सबसे घटिया स्तर पर पहुंच चुकी है। ये बात सब जानते हैं कि अलगाववादियों के उकसाने पर पत्थरबाज सक्रिय हो जाते हैं। हाल ही में भारतीय सेना के प्रवक्त और रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि कशअनीर में पत्थरबाजों का लगभग सफाया हो गया है। लेकिन शायद ये दावे खोखले हैं, क्योंकि कश्मीर में पत्थरबाजों से अपनी आत्मरक्षा कर रहे गढ़वाल राइफल के जवानों पर केस दर्ज हुआ है।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां जिले में गोलीबारी के मामले में गढ़वाल राइफल के जवानों पर केस दर्ज किया है। कुछ लोगों का कहना है कि पत्थरबाजों को पॉलिटिकल प्रोटेक्शन दिया गया है। इस वजह से ही सेना पर FIR हो रही है। जवानों पर RPC की धारा 302 यानी हत्या के केस दर्ज किया गया। इसके अलावा धारा 307 यानी हत्या की कोशिश के केस भी दर्ज किया गया है। एफआईआर में गढ़वाल राइफल की दसवीं इकाई के जवानों पर केस दर्ज किया गया है। इनमें से एक मेजर रैंक का अधिकारी भी शामिल है। बीते शनिवार को गनोवपुरा में पत्थरबाजों ने बवाल काटा। सेना के जवानों पर ही पत्थबाजी शुरू कर दी। रक्षा प्रवक्त का कहना है कि इसके बाद जवानों ने अपनी आत्मरक्षा में पत्थबाजों पर गोली चलाई। भीड़ ने सेना के जवानों को अपना निशाना बनाना चाहा।
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इस दौरान सेना की कार्रवाई में दो पत्थरबाजों की मौत हो गई। इसके बाद तो सियासत उफान मारने लगी, नेताओं के दिल पत्थरबाजों के लिए पिघलने लगे और भारतीय सेना के जवानों पर केस दर्ज कर दिया गया। एक सवाल ये भी है कि अगर पत्थरबाजों की कार्रवाई में कोई जवान शहीद होता तो क्या किसी पत्थरबाज पर केस दर्ज होता ? आज तक कितने पत्थरबाजों पर केस दर्ज हुआ है ? भीड़ का नाम देकर हर बार पत्थरबाजों को छोड़ दिया जाता है। लेकिन इस बार तो हद हो गई। देश की रक्षा कर रहे जवानों पर केस दर्ज करने के लिए सियासत एक बार भी नहीं शर्माई। कानूनी जानकारों का कहना है कि अलगाववादियों और कश्मीर ने नेताओं ने केस को एकतरफा बनाने की पुरजोर कोशिश की है। वाह री सियासत, जवानों पर एफआईआर और पत्थरबाजों पर मरहम।