देवभूमि में चमत्कार! जाख देवता ने खुद ढूंढ निकाली 300 साल पुरानी मूर्ति
Feb 5 2018 3:28PM, Writer:कपिल
इसे चमत्कार नहीं तो और क्या कहेंगे कि एक देवता ने खुद ही 300 साल पुरानी मूर्ति ढूंढ निकाली। भारतवर्ष में ऐसा हुआ है और वो भी देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में ऐसी खबर सांमने आई है। इसके बाद से देशभर के लोगों का ध्यान इस तरफ गया है। उत्तराखंड में ग्राम देवता का अपना अलग ही महत्व है। ग्राम देवताओं को मूर्ति या निसाण के रूप में पूजा जाता है। कई बार उत्तराखंड में ऐसी घटनाएं घटित हो जाती हैं, जिन पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ये घटना उत्तराखंड के जोशीमठ में हुई है। भगवान बदरीनाथ जोशीमठ में ही शीतकाल के दौरान प्रवास पर रहते हैं। जोशीमठ के रविग्राम में 1971 से मलबे में दबी एक देवता की मूर्ति को जिस तरह से बाहर निकाला गया है, उसे लोग चमत्कार ही कह रहे हैं। ये मूर्ति 300 साल पुरानी है। रविग्राम में बीते कई दिनों से जाख देवता की यात्रा करवाई जा रही है।
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इस दौरान ब्रह्मादेव की डोली और छत्र को असपास के गांवों में भ्रमण के लिए ले जाया जाता है। इस दौरान लोग जाख देवता को क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्थानीय लोग जाख देवता से मानौतियां मांगते हैं। जिनकी मन्नतें पूरी हो जाती हं वो जाख देवता को चढ़ावा देते हैं। बताया जाता है कि इस दौरान जाख देवता के पश्वा के आदेश पर उन्हें गांव से ढाई किलोमीटर दूर ले जाया गया। इस जगह का नाम होसी तोक है। वहां पर पश्वा के कहने पर इलाके की खुदाई की ही। उस खुदाई के दौरान इस जगह से कांस्य की जेठुवा देवता की प्रतिमा मिली है। इसके साथ ही वहां पर ब्रह्मा देवता की पत्थर की मूर्ति और एक आरती का बर्तन मिला है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने कुछ खास बातें बताई। स्थानीय लोगों ने बताया कि साल 1971 में यहां भूस्खलन हुआ था। इस दौरान वहां स्थित जेठुला देवता का मंदिर जंमीदोज़ हो गया था।
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1997 के बाद इतना लंबा वक्त बीत गया और लोग इस बारे में भूलने लगे थे। लेकिन जाख देवता के आदेश के बाद यहां खुदाई की तो जमीन में दबी मूर्तियां और आरती का पात्र मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी देवता की मूर्तियों को ढूंढने की कोशिश की गई थी। उस दौरान सफलता नहीं मिली थी। स्थानीय लोग हैरान हैं कि आखिर ये सब कैसे हो गया। जाख देवता को को पहाड़ी इलाकों में भूमि क्षेत्रपाल के रूप में पूजा जाता है। जेठाऊ देवता को जाख देवता का बड़ा भाई कहा जाता है। ये मूर्ति लोगों को खुदाई के बात मिली है। कहा जाता है कि जेठाऊ देवता का मंदिर 300 साल पुराना था। भूस्खलन के बाद ये मंदिर ही जमींदोज हो गया तो, मूर्तिया और आरती के पात्र भी मिट्टी में ही दब गए थे। लोग इस बात को बड़ा चमत्कार मान रहे हैं और फिर से देवता की पूजा अर्चना में जुट गए हैं।