गढ़वाल राइफल पर एक और FIR दर्ज, गुस्से में भारतीय सेना, दिया करारा जवाब !
Feb 5 2018 9:00PM, Writer:मीत
जो पत्थरबाज कश्मीर को बीते दशक से जलाते आ रहे हैं, जिन पत्थरबाजों पर पाकिस्तान के आंतकी संगठनों की सरपरस्ती है, जिन पत्थरबाजों ने बार बार भारतीय सेना के सामने मुसीबतें खड़ी की हैं, उन्ही पत्थरबाजों की आड़ में कश्मीर की सियासत सबसे घटिया स्तर पर पहुंच चुकी है। एक तरफ पाकिस्तान की तरफ से लगातार गोलाबारी जारी है। इस वजह से तनाव लगातार बढ़ रहा है। अब जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हुई है। बताया जा रहा है कि अब कुलगाम में सेना की 10वीं गढ़वाल राइफल के खिलाफ ये एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप लगाया गया है कि सेना द्वारा ओपन फायरिंग की गई। इस फायरिंग में 22 साल के एक युवक के घायल होने की खबर है और इसी मामले में ये एफआईआर दर्ज हुई है। आपको बता दें कि इससे पहले भी गढ़वाल राइफल पर ही एफआईआर दर्ज हुई थी।
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सवाल ये है कि आखिर सेना में ये कैसी सियासत की जा रही है ? इससे पहले जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि सेना को राजनीति से दूर रखना ही देश के लिए अच्छा होगा। भारतीय सेना के प्रवक्ता का कहना है कि भारतीय सेना की गढ़वाल यूनिट के जवानों ने अपनी आत्मरक्षा में ये फायरिंग की है। न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक इस बार एफआईआर कुलगाम में 10वीं गढ़वाल यूनिट के खिलाफ की गई है। उत्तरी कमान के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अन्बु ने दो कहा है कि हमारा रुख इस बारे में बिल्कुल साफ है कि अगर उकसावे वाली कार्रवाई होती है, तो आत्मरक्षा के लिए हम जवाब देंगे। साफ है कि सेना ने भी अपना इरादा साफ कर दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले शोपियां जिले में गोलीबारी के मामले में गढ़वाल राइफल के जवानों पर केस दर्ज किया गया था। कुछ लोगों का कहना है कि पत्थरबाजों को पॉलिटिकल प्रोटेक्शन दिया गया है।
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इस वजह से ही सेना पर FIR हो रही है। जवानों पर RPC की धारा 302 यानी हत्या के केस दर्ज किया गया। इसके अलावा धारा 307 यानी हत्या की कोशिश के केस भी दर्ज किया गया है। एफआईआर में गढ़वाल राइफल की दसवीं इकाई के जवानों पर केस दर्ज किया गया है। इनमें से एक मेजर रैंक का अधिकारी भी शामिल है।सवाल ये भी है कि अगर पत्थरबाजों की कार्रवाई में कोई जवान शहीद होता तो क्या किसी पत्थरबाज पर केस दर्ज होता ? आज तक कितने पत्थरबाजों पर केस दर्ज हुआ है ? भीड़ का नाम देकर हर बार पत्थरबाजों को छोड़ दिया जाता है। लेकिन इस बार तो हद हो गई। देश की रक्षा कर रहे जवानों पर केस दर्ज करने के लिए सियासत एक बार भी नहीं शर्माई।वाह री सियासत, जवानों पर एफआईआर और पत्थरबाजों पर मरहम।