उत्तराखंड के 7 पुलिसकर्मी दोषी करार, दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द होगा सजा का ऐलान
Feb 6 2018 5:34PM, Writer:कपिल
देहरादून का रणवीर फर्जी एनकाउंटर मामला तो आपको याद ही होगा। इस मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तराखंड पुलिस के 7 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। इसके अलावा 11 और पुलिसकर्मियों को इस मामले में बरी कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस फैसले के बाद मृतक रणवीर के पिता रविंदर पल ने दुख जताया है। उनका कहना है कि आदेश को देखने के बाद फिर से कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। आपको बता दें कि इससे पहले दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 6 जून 2014 में इस मामले में बड़ा फैसला दिया था। मामले में कोर्ट द्वारा उस दौरान 17 पुलिसकर्मियों को हत्या, सुबूत मिटाने, अपहरण, आपराधिक साजिश रचने और उसे अंजाम देने के मामले में दोषी करार दिया था। उस दौरान 17 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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ये सुनवाई चार साल तक चली। अब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। उत्तराखंड पुलिस पर आरोप है कि 3 जुलाई 2009 को देहरादून में फ़र्ज़ी एनकाउंटर किया गया। इस दौरान रणवीर की हत्या की गई थी। सबसे पहले आपको बताते हैं कि इस मामले में कौन कौन बरी हुए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने विकास बलूनी, सौरभ नौटियाल, चंद्रपाल, सतबीर सिंह, नागेन्द्र राठी, सुनील सैनी, दारोगा इंद्रभान सिंह, संजय रावत, जसपाल गुंसाई, मोहन सिंह राणा और मनोज कुमार को बरी कर दिया । इसके अलावा डालनवाला कोतवाली के तत्कालीन इंसपेक्टर एस के जायसवाल की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है। इसके अलावा आरा चौकी इंचार्ज जीडी भट्ट, एसओजी प्रभारी नितिन चौहान, कांस्टेबिल अजित सिंह, उप निरीक्षक नीरज यादव,एसओ राजेश बिष्ट और चंद्रमोहन की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।
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आपको बता दें कि कथित मुठभेड में पुलिस ने रणवीर पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थी। उस वक्त पुलिस ने मुठभेड़ में 29 राउंड फायरिंग करने का दावा किया था। इसके बाद 5 जुलाई 2009 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई थी। मृतक के शरीर में 22 गोलियों के निशान पाए गए थे। 3 जुलाई 2009 को एनकाउंटर में रणवीर की हत्या की गई। इसके बाद 5 जुलाई को पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई थी। इस केस में 5 जुलाई को सीबीसीआईडी से जांच कराने के आदेश दिए गए। इसके बाद 6 जुलाई को पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस चला, 7 जुलाई को सीबीसीआईडी की टीम ने जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद सरकार के कहने के बाद 31 जुलाई 2009 को सीबीआई की टीम देहरादून आई थी। 6 जून 2014 को 18 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में 7 पुलिसकर्मियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।