देवभूमि से इंडियन आर्मी को मिले सबसे ज्यादा जवान, रक्षा मंत्रालय के आंकड़े हैं इस बात का सबूत
Feb 7 2018 11:23AM, Writer:कपिल
उत्तराखंड के वीरों और इतिहास के लिए एक और गौरवशाली पल सामने आ गया है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से जब से आंकड़े सामने रखे गए तो हर कोई हैरान रह गया। जी हां बीते पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि देश की सेना में सबसे ज्यादा शामिल होने वाले यानी भर्ती होने वाले उत्तराखंडी ही हैं। हर उत्तराखंडी के लिए ये एक गर्व का विषय है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उनके बारे में भी हम आपको बताने जा रहे है। उत्तराखंड की जनसंख्या के हिसाब से इस प्रदेश से सबसे ज्यादा .14 फीसदी युवा सेना में भर्ती हुए हैं। ये आंकड़ा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, बिहार जैसे राज्यो से काफी ज्यादा है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़े साल 2011 से 2015 के बीच के हैं। इन आंकड़ों में कहा गया है कि इस दौरान देश की सेना में 3 लाख 9 हजार 647 युवा देश की सेना में शामिल हुए हैं।
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आबादी के लिहाज से उत्तराखंड के सबसे ज्यादा युवा देश की सेना में भर्ती हुए हैं। उत्तर प्रदेश का भर्ती प्रतिशत 0.02 है, महाराष्ट्र का भर्ती प्रतिशत 0.023 है, पंजाब-चंडीगढ़ का भर्ती प्रतिशत 0.08 है, राजस्थान भर्ती प्रतिशत 0.03 है, बिहार का भर्ती प्रतिशत 0.018 है, पश्चिम बंगाल का भर्ती प्रतिशत 0.019 है, हरियाणा का भर्ती प्रतिशत 0.061 है, मध्यप्रदेश का भर्ती प्रतिशत 0.020 है, आंध्रप्रदेश का भर्ती प्रतिशत 0.015 है। इन सबसे बीच अकेला उत्तराखंड ऐसा है जहां युवाओं के सेना में भर्ती होने की प्रतिशत 0.14 फीसदी है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उत्तराखंड के युवा किस तरह से देश की सेवा कर रहे हैं। ये वो ही वीर हैं, जो देश के लिए कुर्बान होने के लिए एक पल भी नहीं सोचते। ये वो वीर हैं, जिनके लिए देश सबसे पहले है और उसके बाद ही अपना परिवार है। जाहिर है कि आप भी इन आंकड़ों देखकर अपनी मातृभूमि उत्तराखंड पर गर्व करेंगे।
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एक कहावत है कि उत्तराखंड के हर घर में आपको एक फौजी मिलेगा। इसके पीछे एक खास वजह है। दरअसल पहाड़ के युवाओं में स्टेमिना सबसे ज्यादा होता है। इसके साथ ही पहाड़ के युवाओं में बल और बुद्धि भी बाकियों के मुकाबले ज्यादा होता है। निर्णय लेने की क्षमता के मामले में उत्तराखंडियों को मुकाबला कोई नहीं कर सकता। देश की सेना के लिए ऐसे ही लोगों की जरूरत होती है, जो बिजली से फुर्तीले हों, जिनके लिए कोई भी काम मुश्किल ना हो और जो खतरों से खेलना जानते हों। पहाड़ी को ऐसे ही खिलाड़ी नहीं कहते। वो हर क्षेत्र में खिलाड़ी है। फिर चाहे देश की सेवा की ही बात क्यों ना हो। हर बार उत्तराखंडियों ने अपनी वीरता और शौर्य का परिचय दिया है। बात चाहे करगिल युद्ध की ही क्यों ना करें। इस युद्ध में सबसे ज्यादा शहीद होने वाले उत्तराखंड के ही वीर सिपाही थे। एक बार फिर से इन जवानों को राज्य समीक्षा का सलाम।