उत्तराखंड की दर्दनाक तस्वीर, सड़क और इलाज के अभाव में बुजुर्ग की तड़प-तड़पकर मौत
Feb 7 2018 7:23PM, Writer:कपिल
सड़क के वादे, रोजगार के वादे, विकास के वादे, स्वास्थ्य के वादे, सारे के सारे वादे उसी वक्त फना हो गए जब पहाड़ में सड़क के अभाव में एक बुजुर्ग की तड़प तड़प कर मौत हो गई। टिहरी के चंबा में ऐसी घटना सामने आई है कि उत्तराखंड शर्मसार हो गया। शर्म कीजिए कि सड़क के अभाव में एक जिंदगी ने दम तोड़ दिया। किस बात की खुशी मनाएं ? एक बुजुर्ग इस तरह तड़पकर मर जाता है, हैरानी की बात ये है कि उसे गांव से डंडी कंडी पर ढो कर अस्पताल ले जाया जा रहा था। गांव वालों से जितना हो सकता था, वो किया। लेकिन एक जिंदगी को बचा नहीं पाए। चंबा ब्लॉक के जलेड़ी गांव के गोपाल सिंह की अचानक तबीयत खराब हुई। 84 साल के इस बुजुर्ग को गांव के लोग एक कंडी पर पैदल ही अस्पताल ले जाने लगे। लेकिन गांव से करीब तीन किलोमीटर नीचे पहुंचे तो गोपाल सिंह की मौत हो गई।
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गांव वाले उनके शव को गांव वापस लेकर आ गए। गांव वालों ने इस घटना पर गुस्सा जताया है। गांव वालों का कहना है कि अगर गांव तक सड़क बनी होती तो शायद गोपाल को वक्त पर अस्पताल पहुंचाया जाता और वक्त पर इलाज मिल जाता। शर्मंनाक स्थिति ये है कि तीन साल पहले गोपाल सिंह की पत्नी प्रेमा देवी की मौत भी कुछ ऐसे ही हालातों में हुई थी। प्रेमा देवी को भी बीमार होने पर अस्पताल ले जाया जा रहा था। मुख्य सड़क पर पहुंचने से पहले ही प्रेमा देवी की भी मौत हो गई। दूसरे दिन उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इस घटना को लेकर मृतक के बेटे वीरेन्द्र सिंह नेगी ने कुछ बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि उनके भाई रघुवीर सिंह 20 जून 1988 को शांति सेना की तरफ से श्रीलंका में हुई लड़ाई में देश के लिए शहीद हो गए थे। उनका कहना है कि सरकार ने शहीदों को सम्मान देने की बात कही थी।
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आज तक शहीद के गांव में सड़क तक नहीं पहुंची। गांव वालों का सवाल है कि आखिर गांव के लोग कब तक इस तरह बेमौत मरते रहेंगे। ग्राम प्रधान मालती देवी कहती हैं कि गांव के लोग लंबे वक्त से सड़क की मांग कर रहे हैं। लेकिन सड़क आज तक नहीं बनी। एक साल पहले गांव के लिए सड़क की स्वीकृति दी गई थी लेकिन उस पर आज तक काम नहीं हो पाया। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उधर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने इस बारे में कहा है कि पहले फेज़ में दो किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई है। अब जल्द ही सड़क निर्माण की कार्रवार्इ शुरू कर दी जाएगी। सवाल ये है कि विकास के इस दौर में उत्तराखंड के गांव पीछे क्यों रह गए ? इन गांवों के लोग आज भी उन वादों को याद कर रहे हैं। ना जाने सड़क कब बनेगी और कब तक गावों में इस तरह से लोग इलाज के अभाव में बेमौत मरते रहेंगे ?