गढ़वाल राइफल के वीर सपूत के साथ सुप्रीम कोर्ट, FIR पर रोक, महबूबा मुफ्ती को नोटिस
Feb 12 2018 3:32PM, Writer:आदिशा
10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार को देशभर का साथ मिला, जिसने भी इस केस को सुना या देखा, उसने ही कश्मीर की सरकार के खिलाफ हाथ कड़े किए। आखिरकार देशभर की दुआओं का असर होता दिख रहा है। गढ़वाल राइफल के इस वीर सूपत के हक में सुप्रीम कोर्ट ने भी आवाज उठाई। कोर्ट ने 10 गढ़वाल राइफल्स के मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ FIR पर अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्नीर की सरकार को नोटिस जारी किया है। जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने शोपियां फायरिंग के सिलसिले में मेजर आदित्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। मेजर आदित्य के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने इस FIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मेजर के पिता की याचिका पर कोर्ट ने ये आदेश दिया है।
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आपको बता दें कि ये पूरा मामला 27 जनवरी 2018 का दिन का था। शोपियां में गनापुरा में गढ़वाल राइफल का एक काफिला 250 से ज्यादा पत्थरबाजों से घिर गया। पत्थरबाजों द्वारा भारतीय सेना के वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। सेना के वाहनों पर आग लगाई गई। एक अधिकारी के सिर पर गंभीर चोट आई और वो बेहोश हो गए। इसके बाद पत्थरबाजों की भीड़ ने जवानों का विरोध किया। जवानों के हाथ से हथियार छीनने की भी कोशिश की गई थी। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि सेना ने अपनी आत्मरक्षा में पत्थरबाजों पर गोलियां चलाईं। इस प्रक्रिया में गोली लगने में दो नागरिकों की मौत हो गई। हैरानी की बात है कि 10 गढ़वाल राइफल्स के मेजर आदित्य कुमार पर ये एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उधर जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पत्थर फेंकने वाले लोग निर्दोष थे।
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उधर देश के कई पूर्व सैनिकों ने कहा कि भारतीय सेना को हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार, एक निडर अधिकारी और एक सच्चे देशभक्त। 30 नवंबर 2017 का दिन कोई नहीं भूल सकता। कश्मीर के बैडगांव में फूटलीपोरा में आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना ने एक ऑपरेशन चलाया था। इस ऑपरेशन का नेतृत्व मेजर आदित्य ने किया था। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मुहम्मद के चार आतंकवादियों को मौके पर ही मार डाला गया। 10 गढ़वाल राइफल्स देश में सबसे पराक्रमी यूनिट मानी जाती है। FIR के बाद उत्तराखंड में भी इस बात को लेकर लोगों के बीच गुस्सा भर रहा है। उत्तराखंड के पूर्व सैनिक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, उधर यूकेडी भी प्रदर्शन कर रही है। सवाल ये है कि जो जवान अपनी जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा करते हैं, उनके खिलाफ ऐसी राजनीति क्यों हो रही है ?