image: Protest in rudraprayag

उत्तराखंड में सहारनपुर को शामिल करने के संकेत, पहाड़ में पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन

Feb 24 2018 10:49AM, Writer:कपिल

हाल ही में एक खबर बड़ी वायरल हो रही है। खबर आई थी कि उत्तराखंड के सीएम ने कहा था कि सहारनपुर और उत्तराखंड का सामाजिक और व्यापारिक रिश्ता है और हम पहले भी सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल करने की मांग करते रहे हैं। सीएम के बयान से सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाने की चर्चाओं को बल मिला था। अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल करने संबंधी बयान के विरोध में स्थाई राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति ने विरोध प्रदर्शन कर पुतला दहन किया। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से अपने बयान वापस लेने की मांग के साथ ही गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग की। आंदोलनकारियों ने अपनी बात भी बताई।

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आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड की मांग के पीछे यही मकसद था कि पर्वतीय क्षेत्रों का विकास हो सके, लेकिन सरकार यूपी के एक हिस्से को उत्तराखंड में शामिल कर पहाड़ी प्रदेश की मूल अवधारणा ही खत्म करना चाहती है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के बजाय उत्तर प्रदेश के हिस्सों को उत्तराखंड में शामिल करने की पैरवी कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार की पहाड़ विरोधी सोच जनता के सामने आ गई है। उनका कहना है कि पहाड़ की उपेक्षा कर मैदानी क्षेत्रों को विस्तार दिया जा रहा है। आखिर में कहा गया कि किसी भी सूरत में उत्तराखंड में यूपी के किसी भी हिस्से को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद एक फैसला भी लिया गया है।

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पुतला दहन के बाद निर्णय लिया गया कि आंदोलन को धार देने के लिए ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत, नगर पंचायत और पालिका अध्यक्षों से मुलाकात कर आंदोलन से जनप्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा। इस मौके पर स्थाई राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी, पूर्व पालिका अध्यक्ष देवेन्द्र झिंक्वाण, सत्यपाल नेगी, राय सिंह रावत, केपी ढौंडियाल, विनोद डिमरी, प्यार सिंह नेगी, अशोक चौधरी, लक्ष्मण सिंह रावत, पुरूषोत्तम चन्द्रवाल, बंटी जगवाण, प्रदीप चौधरी, बुद्धि बल्लभ ममगाई, जोत सिंह बिष्ट, महावीर रौथाण, बुद्धि लाल, कुलदीप राणा, नरेश भट्ट, शैलेन्द्र गोस्वामी, रमेश नौटियाल, राय सिंह बिष्ट, हीरा सिंह नेगी, समेत अन्य आंदोलनकारी मौजूद थे।


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