‘ब्यो की चिट्ठी’...गढ़वाली में छपा शादी का ये कार्ड हुआ वायरल, दिल को छू लेंगे ये शब्द !
Mar 15 2018 7:40PM, Writer:कपिल
'हे दीनबंधु भगवंत विनती सुणा हमारी, श्रवण अर कल्पना का ब्यो मां किरपा रैली तुुमारी। धरम की रीती-नीति माणी छन हम ब्वारी ल्यौंणां। आप जना दयालु सज्जन आला जब ब्यौ मां...पौणां छन आप म्यारा...हितैषी पर्ण कुटी मां जब आला...देवतों कू स्वरूप माणि वर-ब्यौंली ते तब आशीष देला। ये ब्यौ बंधन की शुभ घड़ी मां आप जना किरपालु सज्जन लन-ब्यौंली ते आशीष देण आला..अर मेरू घर अपणा चरणों से पवित्र करला।' साधारण से पोस्टकार्ड में शादी का कार्ड छपा है। आपको न्यौता मिला है। इन दिनों सोशल मीडिया पर शादी का ये कार्ड वायरल हो रहा है। शादी के कार्ड की जगह इसे ब्यौ की चिट्ठी कहा जाए तो ज्यादा बेहतर है। ये कार्ड आम कार्ड जैसा नहीं बल्कि एक पोस्टकार्ड जैसा है। जी हां वो ही पोस्टकार्ड जिसके जरिए हम अपने नाते-रिश्तेदारों की कभी खैर खबर लेते थे। जरूरी काम के लिए संदेश भेजा करते थे। ये कार्ड शुद्ध गढ़वाली बोली में छपवाया गया है।
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अगर आप गढ़वाली हैं तो कार्ड की पहली चार लाइनें ही आपका दिल जीत लेंगी। इसके साथ ही इस कार्ड में बेटी बचाओ, बेटी पढाओं के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया है। ये कार्ड लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। युवाओं के बीच काफी वायरल हो रहा है। अपनी बोली और भाषा बचाने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये कार्ड वर पक्ष की तरफ से छपा है। कार्ड में बताया गया है कि दुल्हे का नाम श्रवण है और दुल्हे के पिता का नाम है विष्णु प्रसाद सेमवाल है। विष्णु प्रसाद सेमवाल उत्तराखंड के काफी पुराने लेखक है। वो सामाजिक और पर्यावरण के क्षेत्र में भी काम करते आए हैं। खास बात ये है कि अपनी संस्कृति से उन्हें बेहद प्यार है। उन्होंने लोकभाषा को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाली में कई किताबें भी लिखी हैं। बताया जाता है कि विष्णु प्रसाद सेमवाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी हैं।
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उन्हें इससे पहले कई सम्मानों से नवाजा गया है। इस कार्ड को युवा चित्रकार अतुल गुसांई द्वारा डिजायन दिया गया है। इस कार्ड को छपवाने का मुख्य मकसद उत्तराखंड की संस्कृति को बचाना है। अब आप भी शादी का ये पूरा कार्ड एक बार देख लीजिए।