उत्तराखंड की बेटी के फैन बने धोनी, ये भी देश को वर्ल्ड कप दिलाएगी...रच दिया इतिहास
Mar 16 2018 2:16PM, Writer:आदिशा
उत्तराखंड की बेटी जिसकी हॉकी स्किल्स के धोनी भी दीवाने हैं। उस बेटी ने अपने खेल से वो कर दिखाया है, जो बड़े बड़े दिग्गज देखें तो हैरान रह जाएं। हम बात कर रहे हैं उस वंदना की, जिसकी वंदना आज हॉकी में भविष्य देखने वाला हर बच्चा बच्चा करता है। बेटी ने कुछ ऐसे इतिहास रचे हैं कि आप दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएंगे। यूं समझ लीजिए कि भारतीय हॉकी को जैसे नई उम्मीद मिली है। वंदना कटारिया हरिद्वार के रोशनाबाद की रहने वाली हैं। गांव में खुशियों का माहौल है। जिस समाज में बेटियों को कलंक माना जाता है, उस समाज के लिए एक जवाब हैं वंदना कटारिया। अब वंदना कटारिया उत्तराखंड की पहली ऐसी महिला हॉकी खिलाड़ी बन गई हैं, जो नेशनल हॉकी टीम में खेलेगी। वो उत्तराखंड की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जो कॉमनवेल्थ में खेलेगी। इस बेटी ने अपनी जिंदगी में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए उन तमाम परेशानियों को झेला है, जो इसे खरा सोना बना दे।
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नेशनल वूमेन टीम में वंदना स्ट्राइकर के तौर पर खेल रही हैं। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि वंदना इससे पहले 2016 में भी रियो ओलंपिक में टीम की सदस्य रह चुकी हैं। साल 2006 में वंदना ने जूनियर हॉकी टीम में अपनी जगह बनाई थी। महिला इसके साथ ही सेंट्रल रेलवे टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं। जी हां वंदना कटारिया ने सेंट्रल रेलवे को 30 साल बाद खिताब दिलाया है। रांची में जब 39वीं अखिल भारतीय अंतर रेलवे महिला हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन करवाया गया था, तब वंदना ने अपनी कप्तानी में 30 साल बाद अपनी टीम को ये खिताब दिलवाया था। इस फाइनल में वंदना ने दो गोल दागे थे। इसी दौरान महेंद्र सिंह धोनी भी वंदना की हॉकी स्किल्स को देखकर प्रभावित हुए थे। महेंद्र सिंह धोनी ने ही वंदना को टूर्नामेंट के बेस्ट खिलाड़ी का अवॉर्ड दिया था। धोनी ने कहा था कि ऐसी खेल प्रतिभाएं देश के गांवों से ही निकल सकती हैं।
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अब वंदना का सलेक्शन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हो गया है। ऐसे में उनका कहना है कि वो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को हर हाल में मेडल दिलाएंगी। कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा वंदना वर्ल्ड कप के लिए भी तैयारी कर रही हैं और देश को इसी साल वर्ल्ड कप दिलाना चाहती हैं। हरिद्वार के रोशनाबाद की रहने वाली वंदना के फुर्तीले खेल का कोई जवाब नहीं है। सही पकड़ और मैन टू मैन मार्किंग और ड्रिबलिंग में उनका कोई सानी नहीं। सटीक पास और बिजली की रफ्तार से गोल करना वंदना की आदत है। खैर आज गांव की ये लड़की आसमान पर है। बादलों पर पांव रखकर वंदना चल रही हैं, आंखें अभी और भी बड़े सपने देख रही हैं, उम्मीदों का आसमान सामने है और वंदना ने लक्ष्य साधा है। इस साल अगर कॉमनवेल्थ में गोल्ड और वर्ल्ड कप जीता तो ये 70 मिनट के उस खेल में वंदना का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। शाबाश बेटी जीतकर ही आना।