image: Devanshi rana to participate in shooting world cup

पहाड़ की बेटी: पहले नेशनल लेवल पर जीते मेडल, अब वर्ल्ड कप खेलने ऑस्ट्रेलिया पहुंची

Mar 18 2018 12:04PM, Writer:आदिशा

पहले पिता ने देवभूमि का मान सम्मान बढ़ाया और अब ये ही काम बेटी कर रही है। वो बेटी एक बार फिरद से तैयार है और पिता की तरह ही देवभूमि का नाम खेलों में सबसे आगे करना चाहती है। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की उभरती हुई निशानेबाज देवांशी राणा की। देवांशी राणा अब जूनियर शूटिंग वर्ल्‍ड कप में अपना हुनर दिखाएंगी। ये वर्ल्ड कप 20 से 29 मार्च तक ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होना है। इसके लिए देवांशी भी निकल पड़ी हैं। इस शूटिंग वर्ल्‍ड कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा हो चुकी है। ये पहला मौका होगा जब देहरादून की देवांशी राणा को दो स्पर्धाओं के लिए भारतीय टीम में जगह दी गई है। यानी देवांशी दो ईवेंट में अपना दम दिखाएंगी और गोल्ड पर निशाना लगाएंगी। देवांशी राणा का सलेक्शन 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर स्पोर्टस पिस्टल ईवेंट के लिए हुआ है।

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इससे पहले नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में देवांशी ने दो मेडल अपने नाम किए थे। पूरा उत्तराखंड जसपाल राणा के नाम को अच्छी तरह से जानता है। पद्मश्री पुरस्कार जीतने वाले जसपाल राणा ने देश को कई बार सम्मान और गौरव के पल दिए थे। अब ये जिम्मा जसपाल राणा की बेटी देवांशी राणा ने संभाला है। देवांशी अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की सदस्य हैं, जिन्होंने नेशनल लेवल पर मेडल अपने नाम किया है। देवांशी के दादा नारायण सिंह राणा ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता था। इसके बाद नारायण सिंह राणा के बेटे जसपाल राणा ने तो इतिहास ही रच दिया था। जसपाल राणा ने 1995 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में आठ स्वर्ण पदक जीतकर नया रिकॉर्ड तैयार किया था। 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल कैटेगरी में जसपाल राणा ने कमाल ही कर दिया था।

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1994 के एशियन गेम्स में जसपाल राणा ने गोल्ड मेडल जीता था। फिलहाल जसपाल राणा देहरादून में राणा इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी में बतौर कोच हैं। पद्मश्री से पहले जसपाल राणा को अर्जुन अवॉर्ड भी मिल चुका है। अब जसपाल राणा की बेटी देवांशी राणा भी इसी सिलसिले को आगे बढ़ा रही हैं। देवांशी से अब उम्मीदें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। देवांशी के पिता जसपाल राणा बेटी की इस कामयाबी से बेहद खुश हैं।बड़ी प्रतियोगिता में कद्दावर खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देने वाली देवांशी के लिए इतना कहा जा सकता है कि वो लंबी रेस की खिलाड़ी बन रही हैं। पिता की ही तरह देश का नाम रोशन की जिम्मेदारी अब देवांशी के कंधों पर हैं। ऐसे में उम्मीदें बरकरार हैं। फिलहाल तो हम ये ही कहेंगे कि शआबाश देवांशी इस बार जीतकर ही आना।


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