उत्तराखंड घूमने आई थी विदेश की पामेला, आपदा का दर्द देखा और मानवता की सेवा में जुट गई
Mar 27 2018 4:06PM, Writer:कपिल
आज उत्तराखंड की संस्कृति और संभ्यता की चर्चाएं पूरी दुनिया में होती है। दुनिया जानती है कि उत्तराखंड के लोग आज भी मानवता के लिए बड़े बड़े काम कर रहे हैं। इसलिए कोई सैलानी विदेश से यहां आता है तो यहां की संस्कृति में रच बस जाता। आज हम आपको एक ऐसी विदेशी महिला के बारे में बता रहे हैं, जो उत्तराखंड आई और यहां मानवता की सेवा में जुट गई। वो गरीब लोगों, गरीब परिवारों, बेजुबान जानवरों की मदद कर रही हैं। साउथ अफ्रीका के केपटाउन से आई इस महिला का नाम पामेला तोश है। पाश्चात्य संस्कृति की ये महिला यहां सेवाभाव की अदुभुत मिसाल दे रही हैं। पामेला को कहीं पर भी घायल बेजुबान जानवर दिखते हैं तो वो उनकी मरहम पट्टी में जुट जाती हैं। इसके अलावा गरीब बच्चों और गरीब परिवारों के बीच रहकर भी वो उनकी सेवा कर रही हैं। उनका मानना है कि इंसानियत की सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है।
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बताया जाता है कि जिस दौरान केदार आपदा आई थी, पामेला उस दौरान ऋषिकेश में ही थीं। उस दौरान पामेला के साथी उन्हें छोड़कर चले गए थे। इसके बाद पामेला ने खुद ही आपदा पीड़ितों की मदद करने का प्रण लिया। हालांकि वीजा खत्म होने के बाद वो वापस अपने देश लौटीं लेकिन आपदा से प्रभावित परिवारों के दर्द को जानकर उनसे अपने मुल्क में रहा नहीं गया। इसके ठीक 6 महीने बाद वो फिर से वापस आ गईं और यहीं लोगों की सेवा करने लगीं। इसके बाद पामेला ने सड़कों, प्लेटफॉर्म और यहां वहां असाध्य रोगों से जूझ रहे लोगों की मदद की। पामेला बताती हैं कि वो किसी को भी ऐसे हाल में देखती हैं तो खुद ही उसकी सेवा में जुट जाती हैं। पामेला ने यहां योग सीखा और आज वो एक योग शिक्षक भी हैं। पामेला कहती हैं इसकी प्रेरणा उन्हें योगाचार्य परमहंस स्वामी शिवानंद सरस्वती से मिली थी।
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भले ही पामेला योग शिक्षक हैं, लेकिन उनका मानना है कि कर्मयोग ही इंसान की जिंदगी का सबसे अहम योग है। उनका कहना है कि कर्मयोग ही उन्हें सेवा कार्य करने का मौका देता है। उन्हें दीन-दुखियों की सेवा करने में ही आनंद मिलता है। सात समंदर पार से उत्तराखंड आई हुई ये विदेशी महिला अब लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। एक बार तो ये महिला आकर्षण का केंद्र ही बन गईं। उन्होंने बुरी तरह से जख्मी एक कुत्ते की सेवा रोड पर ही करनी शुरू दी। ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर मौजूद लोग इस महिला की सेवा भावना को देखते रहे। इसके बाद वो विदेशी महिला कुत्ते का उपचार करवाने के लिए अपने साथ ले गई। स्थानीय लोगों को कहना है कि ये महिला काफी दिनों से शहर में मौजूद बेजुबान जानवरों जैसे गाय और कुत्तों की सेवा में जुटी हैं। इस वजह से उनकी तारीफ हर जगह हो रही है।