उत्तराखंड में राहुल द्रविड़ की नई पारी, देवभूमि से बेमिसाल काम की हुई शुरुआत
Apr 10 2018 12:50PM, Writer:मनीषा बिष्ट
राहुल द्रविड़ उत्तराखंड आए और कहा कि देवभूमि वास्तव में दिव्यता और आध्यात्म से परिपूर्ण क्षेत्र है। मां गंगा को राहुल द्रविड़ काफी देर तक निहारते रहे। गंगा आरती के दौरान तो आध्यात्म से परिपूर्ण माहौल देखकर राहुल भक्ति में लीन हो गए। ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में उस दौरान राहुल के साथ उनकी पत्नी विजेता और बेटा अन्वय भी मौजूद था। राहुल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वो जगह है, जहां व्यक्ति पवित्रता की तरफ अग्रसर होता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि मजबूत संकल्पों की राह पर आगे बढ़ने के लिए भी ये जगह सर्वश्रेष्ठ है। यहां से नई पारी का आगाज़ करना राहुल के जीवन की बेस्ट इनिंग में से एक इनिंग साबित होने जा रही है। हालांकि ये पिच क्रिकेट की नहीं बल्कि पर्यावरण की है। जी हां इस दौरान राहुल ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भी भेंट की।
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दरअसल राहुल द्रविड़ अब पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत वो उत्तराखंड से ही कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वामी चिदानंद के साथ मिलकर पर्यावरण के लिए काम करना एक बेहतर अनुभव होगा और इस नई पारी को खेलने में अच्छा लगेगा। उन्होंने कहा कि वो इस क्षेत्र में काम करने के लिए उत्साहित हैं। जब राहुल परमार्थ निकेतन पहुंचे तो स्वामी चिदानंद सरस्वती ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक कहा जाने वाला रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। इसी दौरान राहुल द्रविड़ और उनके परिवार के सदस्यों ने स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के साथ मिलकर विश्व ग्लोब का अभिषेक किया। स्वच्छ जल और स्वच्छता की आपूर्ति के लिए इसका अभिषेक किया गया। इसके बाद राहुल काफी खुश दिखे।
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इस बीच स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मीडिया को बताया कि पूरे विश्व के युवाओं के लिए राहुल आज भी एक रोल मॉडल हैं। उन्होंने कहा कि राहुल पहले क्रिकेट की पिच पर दीवार की तरह टिके रहे और अब पर्यावरण संरक्षण के लिए के लिए भी शानदार काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि राहुल द्रविड़ ने 2012 में क्रिकेट से सन्यास ले लिया था। फिलहाल द्रविड़ उत्तराखंड प्रवास पर ही बताए जा रहे हैं। खासतौर पर मसूरी भी राहुल और उनके परिवार को काफी पसंद है। अब उत्तराखंड से राहुल द्रविड़ एक और पारी का आगाज़ कर चुके हैं। अब आने वाले वक्त में ये पारी कैसी रहेगी और किसी तरह से पर्यावरण को बचाने की दिशा में राहुल एक बार फिर दीवर साबित होंगे ? इसके लिए मेहनत भी वैसी ही चाहिए, जिस तरह से उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को उड़ान देने के लिए की थी।