image: Jakh kauthig in uttarakhand on fifteen april

Video: उत्तराखंड में 15 अप्रैल को दिखेगा ग़जब नज़ारा, दहकते अंगारों पर नाचेंगे जाख देवता

Apr 13 2018 8:13AM, Writer:आदिशा

अगर आपने अब तक ये नज़ारा नहीं देखा है, तो तैयार हो जाइए। एक बार फिर से देवभूमि की अलौकिक शक्ति को प्रणाम करने के लिए तैयार हो जाइए। अपनी आंखों के सामने जब आप दहकते अंगारों में जाख देवता को उतरते देखेंगे तडो हैरानी से आंखें फटी की फटी रह जाएंगी। केदारघाटी के रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी से बस 5 किलोमीटर की दूरी पर है जाख देवता का प्राचीन मंदिर। जाख देवता को यक्षराज भी कहा जाता है। 15 अप्रैल को जाख देवता पश्वा पर अवतरित होकर धधकते अंगारों पर नृत्य करेंगे। इस अनुष्ठान के लिए तमाम तैयारियां हो चुकी हैं। देवशाल, कोठेड़ा और नारायणकोटी गांव के लोगों ने जाखधार मंदिर परिसर में इसे लेकर मंत्रणा की। कहा जाता है कि बीते 1100 साल से ये परंपरा लगातार चली आ रही है। संक्रांति के दिन विंध्यवासिनी मंदिर से जाख देवता की मूर्ति को उनके मूल मंदिर लाया जाता है।

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इसके बाद यहां विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। अनुष्ठान के लिए काफी दिनों पहले से पहले से ही कई क्विंटल सूखी लकड़ियों को जलाया जाता है। ये लकड़ियां करीब 3 से 4 दिन तक जलती ही रहती हैं। इसके बाद ये लकड़ियां अंगारों में तब्दील हो जाती हैं। करीब 5 मीटर के क्षेत्रफल में दहकते अंगारे और इन अंगारों के पास जाने की कोई सोच भी नहीं सकता। इन अंगारों की तपन इतनी जबरदस्त होती है कि 5 मीटर दूर से ही आप इसे महसूस कर सकते हैं। लेकिन इन्हीं अंगारों में जब जाख देवता नंगे पैर चलते हैं, तो विज्ञान वहीं खत्म हो जाता है। सारी की सारी बातें धरी रह जाती हैं। मन में आस्था का ज्वार फूटता है और मन खुद से ही सवाल पूछता है कि ये कौन सी धरती है जहां हम आ गए। दहकते अंगारों के बीच बाबा जाख को चलते देखना सौभाग्य कहा जाता है।

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इसके बाद इन धधकते अंगारों पर जाख देवता नृत्य करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ ही यहां कुछ विचित्र घटनाएं होती हैं। जाख राजा को बारिश का देवता भी कहा जाता है। कहा जाता है कि जब भी यहां कौथिग होता है और जैसे ही जाख देवता अंगारों के बीच भक्तों को अपना रूप दिखाते हैं तो इसके तरंत बाद बारिश शुरू हो जाती है। आप भी ये वीडियो देखिए।


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