image: Roshan nailwal died due to swine flu

नहीं रहे गैरसैँण के होनहार युवा शिक्षक, 5 दिन बाद सामने आई मौत की वजह !

Apr 19 2018 1:40PM, Writer:कपिल

कहते हैं कि अगर डॉक्टर किसी बीमारी पर सही तरीके से ध्यान दे तो उसे वक्त रहते ठीक कर सकता है। लेकिन पहाड़ के युवा और होनहार शिक्षक रोशन नैलवाल के साथ जो हुआ है, वो सच में हैरान कर देने वाला है। रोशन नैलवाल को स्वाइन फ्लू था और हैरानी की बात ये है कि कोई भी डॉक्ट्र इस मर्ज को पकड़ नहीं पाया। मौत के पांच दिन बाद पता चला कि रोशन की मौत स्वाइन फ्लू से हुई है। शिक्षक और रिसर्च स्कॉलर रोशन नैलवाल अपने परिवार में सबसे बड़े बेटे थे। 26 साल के रोशन राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में शिक्षक थे। एक युवा शिक्षक, जो कि अपने छात्रों से बेहद प्यार करते थे। परिजनों को रोशन से काफी उम्मीदें थी क्योंकि परिवार की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।

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हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से एमए और बीएड कर रोशन नैलवाल भूगोल में पीएचडी कर रहे थे। अगले ही महीने उनकी थिसिस जमा होनी थी। रोशन प्राथमिक और जूनियर वर्ग में टीईटी क्वालीफाई भी कर चुके थे। एक अप्रैल को रोशन को लगा कि उन्हें बुखार है। स्थानीय चिकित्सकों से दवा ली और बुखार में कमी आई। पांच अप्रैल तक स्कूल में पढ़ाते रहे। धीरे धीरे बुखार फिर से बढ़ने लगा था। बुखार नहीं उतरा तो 6 अप्रैल को जांच कराई। जांच में पता चला कि रोशन को टॉयफाइड हुआ है। दो दिन तक हालत में सुधार नहीं हुआ, तो परिवार वाले रोशन को रानीखेत ले गए। हालत बिगड़ते देख रानीखेत के डॉक्टर्स ने 9 अप्रैल की सुबह रोशन को हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया। हल्द्वानी में उपचार कर रहे डॉक्टर्स ने कहा कि फेफड़ों में संक्रमण हो गया है।

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हल्द्वानी से रोशन को बरेली रेफर किया गया। परिवार वालों ने वहां डॉक्टर्स को कहा कि कहीं स्वाइन फ्लू तों नहीं ? लेकिन डॉक्टर्स तो डॉक्टर्स ठहरे, उन्होंने अपने ही हिसाब से जांच शुरू कर दी और बिल बैठा लिया। परिजनों के बार-बार आग्रह करने के बाद 12 अप्रैल को रोशन का सैंपल लिया गया। 13 अप्रैल को रोशन नैलवाल की मौत हो गई। 16 अप्रैल को उनके सैंपल को परीक्षण के लिए लखनऊ भेजा गया। 18 अप्रैल को लखनऊ से रिपोर्ट आई, तो बरेली के डॉक्टर्स ने कहा कि रोशन नैलवाल स्वाइन फ्लू पॉजिटिव थे। ये हाल है देश में स्वास्थ्य व्यवस्था का। एक मरीज एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश तक चक्कर लगाता है और डॉक्टर्स अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। स्वाइन फ्लू लगातार घातक साबित हो रहा है और डॉक्टर्स के कान में जूं तक नहीं रेंग रही।


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