उत्तराखंड की संस्कृति को प्रणाम, रूस छोड़कर देवभूमि में शादी करने आई ये जोड़ी
May 13 2018 8:26PM, Writer:कपिल
उत्तराखंड अब दुनिया के आध्यात्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। उत्तराखंड की संस्कृति और वैदिक परंपरा का सम्मान करने वाले दुनिया में चारों तरफ हैं। हाल ही में तीर्थनगरी में इसका एक उदाहरण भी देखने को मिला है। रूस के एक जोड़े ने तीर्थनगरी में गंगा के तट पर सात फेरे लिए। ये हैं रूस के सोची शहर के रहने वाले रूस्लान और वेलोवाइवा। ये दोनों ही एक दूसरे से काफी पहले से परिचित हैं। कुछ साल पहले ये दोनों ही भारत घूमने आए थे। यहां उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति और वैदिक परंपरा को देखा तो धन्य हो गए। बस फिर क्या था, दोनों ने ही वैदिक परंपराओं के साथ शादी करने का फैसला कर लिया। इस बार ये दोनों खास तौर पर शादी करने के लिए उत्तराखंड आए।
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रूस्लान और वेलोवाइवा ने कहा कि रूस से ऋषिकेश आकर शादी करना हमारे लिए ईश्वरीय वरदान से कम नहीं है। पति पत्नी को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया है। तीर्थनगरी के परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इस विवाह को संपन्न कराने का काम परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों और ऋषिकुमारों ने किया । स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने नव विवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया। स्वामी चिदानंद ने इस मौके पर कहा कि पूरी दुनिया में हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक उत्सव मनाते हैं। इन उत्सवों में विवाहोत्सव प्रमुख होता है। मां गंगा के तट पर दुनिया के दो देशों की संस्कृतियों का मिलन हो रहा है। ये ऐतिहासिक पल है। उत्तराखंड के लिए ये गर्व की बात है।