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देहरादून में बनेगा रिकॉर्ड..2 लाख का टारगेट, 5000 लोगों की मेहनत और मिशन रिस्पना

May 19 2018 1:05PM, Writer:कपिल

तो लीजिए देहरादून तैयार है। रिस्पना नदी को फिर से नया जीवन देने के लिए एक बड़ी मुहिम शुरु हो रही है। वो ही रिसन्ना जिसके पास जाते ही और नाक को कपड़े से ढक लेते हैं। वो ही रिस्पना नदी, जो हम इंसानों की लापरवाही की वजह से कहीं गुम हो गई और एक नालके में तब्दील हो गई। जरा सोचिए वो ही रिस्पना नदी अगर आपको कल-कल बहती हुई दिखे। जाहिर है कि ये अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड होगा। ये काम बहुत ही कठिन है, लेकिन असंभव नहीं कह सकते। इसके लिए आज से देहरादूनवासी भी सजग हो गए हैं। राज्य सरकार के आह्वान पर आज देहरादून में अलग अलग संगठनों के 5 हजार वॉलेंटियर जुट गए। अलग अलग शिक्षण संस्थानों से वॉलेंटियर, एनजीओ, गैर सरकारी संगठन, सेना, केंद्रीय संस्थानों, अलग अलग केंद्रीय संस्थान, पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान और अलग अलग विभागों के कर्मचारियों की मदद से ये गढ्ढे बनाए जा रहे हैं।

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इन दो लाख गढ्ढों में 2 लाख पौधे लगाए जाने हैं। रिस्पना नदी के उद्गम से लेकर संगम तक ये पौधारोपण हो रहा है। प्रशासन द्वारा इसकी तैयारी कर दी गई हैं। 39 ब्लाकों में सेक्टर अधिकारियों को तैनात कर दिया गया है। आपको बता दें कि मिशन रिस्पना प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। रिस्पना नदी का उद्गम स्रोत शिखर फॉल है। यहां से लेकर देहरादून के मोथरोवाला तक 39 अलग-अलग सेक्टर तैयार किए गए हैं। वन विभाग और ईको टास्क फोर्स को नोडल विभाग बनाया गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन गढ्ढों को खोदने के लिए करीब 5 हजार से ज्यादा लोग श्रमदान कर रहे हैं। हर सेक्टर में डॉक्टर्स की टीम मौजूद है। पीने के पानी, पार्किंग और अन्य वॉलेंटियर्स के लिए तमाम व्यवस्थाओं का प्रबंध किया गया है। इस दौैरान सीएम के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट भी मौजूद थे।


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