‘जीवन का द्वंद आसमान पर’, पढ़िए CM त्रिवेंद्र के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का ये ब्लॉग
May 22 2018 5:43PM, Writer:शैलेश
हाथ में लाखों का पैकेज, मन में कुछ कर गुज़रने का जुनून और दिल में उत्तराखंड के लिए बेशुमार प्यार। बायोडाटा में देश के बड़े चैनलों में काम करने का अनुभव और हाथ में लाखों की सैलरी थी। इसके बाद भी दिल्ली को छोड़कर रमेश भट्ट ने उत्तराखंड का रुख किया था। उत्तराखंड में सरकार द्वारा किए जाने वाले कामों की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाने का जिम्मा वो बखूबी निभा रहे हैं। खास बात ये है कि पिछले साल इसी दिन, यानी 22 मई 2017 को रमेश भट्ट ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार का पद संभाला था। रमेश भट्ट उत्तराखंड का वो चेहरा हैं जिन्हें भारतीय मानवाधिकार परिषद की तरफ से युवाओं को प्रेरित करने के लिए ‘एक्ससेप्शनल लीडरशिप एंड सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2017’ से नवाजा गया था। उन्होंने इस अनुभव को बेहद खास बताते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट की है, जिसमें उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार के तौर पर एक वर्ष के अपने बहुत ही निजी अनुभव को उन्होंने साझा किया है।
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रमेश भट्ट ने लिखा है कि...‘’22 मई 2017। जीवन का द्वंद आसमान पर। घड़ी की सुई के साथ जिन्दगी का एक और बड़ा फैसला लेने के समय। फैसले के खिलाफ ज्यादा लोगों की राय ने काम और मुश्किल में डाल दिया। परिवार भी पसोपेश में। मगर होनी इतनी प्रबल होती है कि मनुष्य उसके सामने बौना लगने लगता है। मेरे साथ भी वही हुआ। न्यूज नेशन से अलग होकर उत्तराखंड को अपनी कर्मस्थली बनाने का फैसला। माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ मीडिया सलाहकार की भूमिका में जिन्दगी को एक नयी पहचान देने निकल पड़ा। 365 दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला। हर पल कुछ न कुछ नया करने का प्रयास किया। इन सभी बातों से ऊपर ,मैं परमात्मा का धन्यवाद करना चाहूंगा कि, मुझे एक ऐसे व्यक्ति के सानिध्य में काम कर रहा हूं, जो ईमानदार, सरल सुलभ सहृदय, जैसे गुणों से परिपूर्ण हैं। बिना लाग लपेट के ईमानदारी से राज्य के विकास में आगे बढ़ रहे हैं, वो राज्य हित में कठोर फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटते’। आगे भी उन्होंने बहुत कुछ लिखा है।
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CM त्रिवेन्द्र के मीडिया सलाहकार आगे लिखते हैं कि ‘’मुख्यमंत्री दिन में 15, 16 घंटे लगातार कार्य करते हैं, उनकी कर्मठता एक नई ऊर्जा का संचार करती है। और मेरे जीवन का विगत एक वर्ष इन्हीं गुणों से तपकर और भी ज्यादा निखरा है। आज मैं उन सब लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जो मेरे साथी रहे, जिन्होंने इस मिशन में आगे बढ़ने का हौसला दिया, मेरा साथ दिया, प्यार दिया, काम को सराहा। मैं उन लोगों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जो मेरे आलोचक बने रहे और मुझे बेहतर करने की प्रेरणा देते रहे। एक साल की इस छोटी सी लेकिन एकदम नई इस यात्रा में कुछ बदलने की कोशिश की है, कुछ बदलने के प्रयास जारी हैं। मैने लोगों को बदलते देखा मगर खुशी इस बात की है कि, परिस्थितयां जो भी रही, मैं तटस्थ था, तटस्थ हूं और तटस्थ रहूंगा’। आज भी मैं कवि पंजवार की पंक्तियों से अपनी बात समाप्त कर रहा हूं....
आंधियों में दीप बनकर जलते जाना जिंदगी है
पत्त्थरों को तोड़ निर्झर का निकलना जिंदगी है।
सोचता हूँ दो घडी छाया तले विश्राम कर लूँ...
किंतु कोई कह रहा दिन रात चलना जिंदगी है।
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- सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट के ब्लॉग से साभार।
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