उत्तराखंड में इतिहास बना : शुरू हुई स्कूबा डाइविंग, झील में अब देखिये पुराना टिहरी शहर
May 27 2018 3:44PM, Writer:ईशान
अपने उत्तराखंड में हर दिन एक नया इतिहास बना रहा है। टिहरी लेक फेस्टिवल के आखिरी दिन आज, यानि कि 27 मई को, टिहरी झील में स्कूबा डाइविंग की शुरुवात भी हो गयी है। आपको बता दें कि टिहरी झील में पहली बार स्कूबा डाइविंग का इवेंट किया जा रहा है। जाहिर है इससे उत्तराखंड में पर्यटन की संभावनाएं और अधिक बढ़ गयी हैं। स्कूबा डाइविंग इवेंट के दौरान यहाँ आये हुए विशेषज्ञों ने टिहरी लेक में काफी गहराई में जाकर स्कूबा डाइविंग की और टिहरी झील में डूबे हुए विश्वप्रसिद्ध टिहरी शहर के अवशेष देखे। आपको बता दें टिहरी झील महोत्सव के दौरान झील में पहली बार स्कूबा डाइविंग का इवेंट किया गया है। अभी आम-जन के लिए स्कूबा डाइविंग इवेंट उपलब्ध नहीं कराया गया है। शुक्रवार को शुरू हुए टिहरी झील महोत्सव के तीसरे दिन उत्तराखंड और टिहरी झील के लिए एक ऐतिहासिक पल आया जब वर्ष 2006 में बनी टिहरी झील में पहली बार स्कूबा डाइविंग की गयी। अभी तक टिहरी झील में केवल वाटर स्पोट्र्स और वोटिंग का संचालन किया जा रहा था, जिसके द्वारा देश विदेश से आने वाले पर्यटक वाटर स्पोट्र्स और नौकायन का आनंद ले रहे थे।
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टिहरी लेक एस्तिवल के तीसरे दिन 15 लोगों ने स्कूबा डाइविंग का आनंद लिया। इसके लिए दिल्ली से एक्सपर्ट्स की टीम आई थी। स्कूबा डाइविंग के विशेषज्ञ टिहरी झील के अन्दर का नजारा देखकर हैरान रह गए जब उन्होंने पुरानी टिहरी के अवशेषों को देखकर डूबे हुए शहर का दीदार किया। इससे जहां एक तरफ टिहरी झील में स्कूबा डाइविंग के साथ ही पर्यटन की अपार संभावनाएं बढ़ गयी हैं वहीँ झील में डूबे हुए पुराने टिहरी शहर के अवशेष पर्यटकों को विशेष रूप से रोमांचित करेंगे। झील के पानी के अन्दर पुराने टिहरी शहर के दीदार करने से यहां की संस्कृति के बारे में भी जानकारी मिलेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की उत्तराखंड की टिहरी झील को एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोशिशें रंग ला रही हैं। स्कूबा डाइविंग शुरू होते ही यहां पर वाटर स्पोट्र्स में देश का सबसे बड़ा हब बनने की पूरी संभावनाएं हो गयी हैं। इसके साथ ही पहाड़ के युवाओं के लिए भी साहसिक खेलों में नाम कमाने के क्षेत्र में अवसर भी खुल गए हैं।