image: Handicap family doesnt get govt benifits

Video: पहाड़ रो पड़ा, जब एक दिव्यांग परिवार ने अपना दर्द बताया... शेयर कीजिए

May 30 2018 5:13PM, Writer:कपिल

उत्तराखंड के टिहरी जिले के बरनौली गांव का ये पूरा परिवार दिव्यांग है। 70 साल के श्री राम के परिवार के सभी सदस्य दिव्यांग हैं। श्रीराम खुद पूर्ण रूप से बधिर (deaf) हैं और इनकी पत्नी मानसिक रूप से दिव्यांग हैं। इनके दो बेटे हैं। प्रमोद 28 साल का है और विनोद 26 साल का है, ये दोनों भी मानसिक रूप से दिव्यांग हैं। पहाड़ के कठिन जीवन को किसी तरह से जी रहे इस परिवार की सरकारी सहायता भी कई समय पहले बंद हो चुकी है। दरअसल समाज कल्याण विभाग उत्तराखंड के दिव्यागों को 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन बांटता है, वर्ष 2016 में आधार नम्बर और CBS बैंक अकाउंट अनिवार्य कर दिया गया था, जिसके बाद से बिना आधार वाले लाभार्थियों की पेंशन रोक दी गयी थी। विभाग द्वारा ये कदम फर्जी पेंशनरों को हटाने के लिए उठाया गया था। इसके बाद जब ये मामला एक बड़े राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित हुआ तो दिसंबर 2018 में आधार की अनिवार्यता के आदेश को समाज कल्याण द्वारा उलट दिया गया था। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में पेंशन वितरण में आधार की अनिवार्यता नहीं है, परन्तु आदेशों के इस उलट-फेर में उत्तराखंड के कई जरूरतमंद लाभार्थी सरकारी फाइलों में कहीं खो गए हैं।
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टिहरी का ये परिवार उन्हीं जरूरतमंद लाभार्थियों में से एक है। राज्य समीक्षा से बातचीत में इस परिवार के पड़ोस में ही रहने वाले चन्दन सिंह रावत ने बताया कि "परिवार जिस घर में रहता है वो चार-पुश्त पुराना है और अत्यधिक जर्जर हालात में है। इस दिव्यांग परिवार को सरकार द्वारा चलायी जा रही किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है।"

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चन्दन सिंह आगे कहते हैं कि "दिव्यांग परिवार के पास खाना बनाने को गैस कनेक्शन नहीं है, अगर आग जला भी ले तो ये परिवार खायेगा क्या और अगर कहीं से कुछ बंदोबस्त करके कुछ खा भी ले तो परिवार के पास टॉयलेट की सुविधा नहीं है। जिन्दा रहना ही इस परिवार के लिए सजा बनती जा रही है। कुछ साल पहले तक इनका गुजरा समाज कल्याण की पेंशन से बामुश्किल चल पाता था। अब पेंशन भी नहीं आती।" ये विडियो भी श्रीराम के पड़ोसियों ने सोशल मीडिया पर इसीलिए डाला है ताकि किसी भी माध्यम से इस अभावग्रस्त दिव्यांग परिवार की दुर्दशा सरकार तक पंहुचे, और इनका कुछ भला किया जा सके। चन्दन ने इस सम्बन्ध में समाज कल्याण विभाग और जिले के डीएम, सीडीओ कार्यालय को ईमेल भी भेजी है। देखना ये है कि इस परिवार की सुध लेने में विभागों को अभी और कितना वक्त लगता है।


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