image: Farmers of pauri fighting with migration

पहाड़ में चमत्कार! सिर्फ 5 साल के भीतर ही 148 किसानों ने पलायन रोक कर दिखाया

May 30 2018 7:33PM, Writer:कपिल

पहले तो कड़ी मेहनत, ऊपर से पलायन से जंग। पहाड़ का पानी और जवानी रोकने के लिए 148 किसानों ने जिस धौर्य और जीवटता का परिचय दिया है, वो बेमिसाल है। वास्तव में ये 148 किसान अब ईनाम के हकदार हैं। हम बात कर रहे हैं पौड़ी के जयहरीखाल ब्लॉक के पीड़ा गांव की। इस गांव की पीड़ा ये थी कि यहां जबरदस्त ढंग से पलायन हो रहा था। किसान यहां बेबस हो गए थे। वो जो भी फसल यहां उगाते थे, वो फसल जंगली जानवर बर्बाद कर देते थे। ऐसे में बेचारे किसान करें तो क्या करें ? गांव के 148 काश्तकारों ने पारंपरिक खेती छोड़ दी। साल 2012 तक यहां सब कुछ खत्म हो गया था। आखिरकार 2013 में पीड़ा गांव के निवासी वीरेंद्र सिंह रावत ने सगंध पौधा केंद्र से संपर्क किया। यहां उन्होंने अपनी पीड़ा बताई तो सगंध पौधा केंद्र के वैज्ञानिकों ने उनकी मदद करने की ठानी।

यह भी पढें - उत्तराखंड टॉपर को दो दिन बाद पता चला अपना रिजल्ट...वो मजदूरी करने गया था
कुछ वक्त बाद केंद्र के वैज्ञानिक ने पीड़ा गांव के साथ साथ बेवड़ी गांव और चुंडई गांव में किसानों द्वारा छोड़ी गई जमीन का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि ये जमीन लेमनग्रास के लिए उपयुक्त है। इसक बाद तो वीरेंद्र सिंह रावत ने अपनी 20 नाली जमीन पर लेमनग्रास की खेती शुरू कर दी। वीरेंद्र सिंह रावत को देखकर गांव के ही बाकी 26 काश्तकारों भी 2015 में अपने बंजर पड़े खेतों की तरफ लौटे। करीब 6 हेक्टेयर भूमि में लेमनग्रास उगाई गई। ये देखकर 122 और किसान भी वापस लौटे और करीब 11 हेक्टेयर भूमि पर तेजपात का रोपण कर दिया। आज लेमनग्रास और तेजपातच की वजह से जबरदस्त कमाई हो रही है। युवाओं के साथ साथ आसपास के गांवों के लोग इस मुहिम से जुड़ रहे है। धीरे धीरे ही सही लोग वापस लौट रहे हैं और अपने पहाड़ में रहकर खुश हैं।


  • MORE UTTARAKHAND NEWS

View More Latest Uttarakhand News
  • TRENDING IN UTTARAKHAND

View More Trending News
  • More News...

News Home