देशभर में बिकेगा उत्तराखंड का ‘कोदा बिस्किट’, केंद्र सरकार ने लगाई मुहर…20 गांव जुड़े
Jun 5 2018 10:13AM, Writer:आदिशा
उत्तराखंड के लिहाज से एक बेहतरीन खबर है। पहाड़ के कोदा यानी मंडुआ ने देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही कुछ युवाओं के द्वारा कोदा बर्फी की शुरुआत की गई थी। अब कोदा अक बार फिर से उत्तराखंड के गांव-गांव में लहलहाएगा। इसकी शुरुआत केंद्र सरकार की तरफ से हो गई है और खास बात ये है कि केंद्र सरकार की टीम ने इस पर मुहर लगा है। फिलहाल इस पहल से 20 गांवों के 952 लोग जुड़ गए हैं। इस बिस्किट को हिलांस नाम से बेचा जाएगा। भारत सरकार के अनुसूचित जनजाति मंत्रालय भारत की टीम ने मोनार में कोदा से बनने वाले उत्पाद का परीक्षण कर लिया है। खबर है कि इसी महीने मंत्रालय का मां चिल्टा आजीविका स्वायत्त सहकारिता लोहारखेत के साथ एग्रीमेंट होगा। आपको बता दें कि मन की बात में पीएम मोदी खुद कोदा की तारीफ कर चुके हैं। अब आपको बताते हैं कि कैसे इससे रोजगार बढ़ेगा और पलायन रुकेगा।
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केंद्र सरकार अब देशभर में 56 आउटलेट्स तैयार कर रही है। ये महज़ एक शुरुआत होगा। इनमें मंडुए से बने उत्पादों को रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि मंत्रालय बिस्किट के सैंपल भी ले गया है। जून में ही ये समझौता भी हो जाएगा। फिलहाल इस मुहिम में प्रत्यक्ष रूप से 8 सदस्य काम कर रहे हैं। उन्हें चार हजार से 12 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा है। इसके अलावा इस मुहिम में अप्रत्यक्ष रूप से 20 गांवों के 952 लोग इससे जुड़े हुए हैं। सहकारिता के माध्यम से हर साल करीब 5 लाख से ज्यादा की आय अर्जित करना है। मंडुवे के साथ मक्का और चौलाई(मार्छा) के बिस्किट भी बनाए जा रहे हैं। खास बात ये है कि स्वास्थ्यवर्धक होने की वजह से लोगों के द्वारा ये पसंद किया जा रहा है। 250 ग्राम के एक बिस्किट के पैकेट की कीमत करीब 25 रुपये तय की गई है।
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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के लोहारखेत में 10 हेक्टेयर में मंडुवे का उत्पादन होगा। जैसा कि हम पहले भी बता चुके हैं कि ये सिर्फ एक शुरुआत है। लोहारखेत में 10 हेक्टेयर में कलस्टर बनाए गए हैं और इनमें मंडुवे की खेती कराई जा रही है। करीब लगभग डेढ़ कुंतल तक बीज लोगों में बांटा गया है। बताया जा रहा है कि इस 10 हेक्टेयर में करीब 160 कुंतल कोदा का उत्पादन होगा। इसके साथ ही खास बात ये है कि कपकोट ब्लॉक के करीब 20 गांवों में कोदा और मार्छा का उत्पादन हो रहा है। इसे अब दोगुना करने का लक्ष्य तैयार किया गया है। लोहारखेत के आउटलेट्स में ढाई लाख लागत की नैनो पैकेजिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। केंद्र सरकार की मदद से इससे बढ़ाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे पलायन तो रुकेगा ही, साथ ही रोजगार भी मिलेगा।