Video: पहाड़ की आत्मा में बसा ये खूबसूरत गीत, राकेश और नेहा की दिलकश आवाज में सुनिए
Jun 5 2018 10:53AM, Writer:कपिल
एक कोशिश है ये... आज की पीढ़ी को बीते हुए कल की पीढ़ी से मिलाने की। ये सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि आत्मा है पहाड़ की। आने वाले सुनहरे कल को बीते हुए स्वर्णिम कल से मिलाते हैं...चलो कुछ अच्छा सा गाते हैं। राकेश भारद्वाज और नेहा खंखरियाल के मन में ये ख्याल ज़रूर आया होगा। पहाड़ के कालजयी कवि नरेंद्र सिंह नेगी जी की एक रचना, जो वास्तव में दिल को छू लेती है। सवाल ये है कि क्या इस गीत में उसी खूबसूरती को बरकरार रखा गया है ? जब आप इस गीत को सुनेंगे तो इस सवाल का जवाब भी आपके सामने होगा। उत्तराखंड के महान गीतकार चंद्र सिंह राही जी के सुपुत्र हैं राकेश भारद्वाज। राकेश आज किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं। पहाड़ी सोल (Pahadi Soul) यानी पहाड़ की आत्मा...शायद कुछ सोचकर ही राकेश ने ये नाम अपने ग्रुप को दिया होगा।
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ये गीत महज़ काग़ज़ में लिखे कुछ अक्षर नहीं है बल्कि एक पीड़ी, संवेदना, प्यार और दुलार की पाती से संजोया गया उपहार है। यकीन मानिए गीत को बंद आंखों से सुनिए और फिर देखिए...मन की शांति के लिए ये 5 मिनट 17 सेकंड काफी हैं। राकेश भारद्वाज और नेहा खंखरियाल ने इस गीत की आत्मा को बरकरार रखते हुए बस एक नया कलेवर दिया है, जो कि अद्भुत है। धन्य हैं पहाड़ के मूर्धन्य कवि नरेंद्र सिंह नेगी जी और धन्य हैं ये युवा जो बीते हुए कल को आज और आने वाले कल से मिला रहे हैं। सुनिए और जरूर सुनिए ये बेहतरीन पेशकश...क्या दिन क्या रात।