देवभूमि के लिए सबसे काला दिन, टिहरी गढ़वाल में सिस्टम के आगे रोई मां की ममता!
Jun 13 2018 1:52AM, Writer:आदिशा
उत्तराखंड में सड़क पर डिलिवरी होती है। जी हां सड़क पर। कोई अस्पताल नहीं, अस्पताल है तो डॉक्टर नहीं, डॉक्टर है तो टाइम नहीं और जब टाइम आता है तो मरीज ही नहीं। क्या करें ऐसी व्यवस्था का ? इसे देवभूमि के सबसे काले दिनों में शुमार ना करें ? इसे पहाड़ के सपनों से खिलवाड़ ना कहें ? इसे रोती बिलखती मां के आंसुओं का सैलाब ना कहें ? जिसकी आंखों ने उस सड़क पर दरिया से ज्यादा पानी बहा दिया। वो दर्द से कराहती रही और 108 सेवा कहीं दूर दूर तक नहीं। सवाल ये है कि अगर उस मां की मौत हो जाती तो क्या जवाब देती 108 ? टिहरी के दिखोलगांव में ऐसा मंजर देखने को मिला, जब दर्द से कराहती महिला ने सड़क पर बच्ची को जन्म दिया। हैरानी और शर्म तो तब आती है, जब पता चलता है कि 108 वाहन गांव से सिर्फ दो किलोमीटर दूर ही खड़ा रहता है।
यह भी पढें - देवभूमि के लिए सबसे काला दिन, पहाड़ में सरकार के आगे रक्तरंजित हुई मां की ममता
सोमवार रात दिखोलगांव में रह रही गौरी देवी नाम की महिला को प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद मकान मालिक सुशील रावत को जगाया गया। मकान मालिक ने 108 सेवा को फोन किया। सोचा था कि जल्द ही 108 आएगी और महिला को अस्पताल ले जाया जा सकेगा। लेकिन हुआ तो कुछ और ही। महिला दर्द से कराहने लगी तो गांव के बाकी लोग और महिलाएं वहां पहुंच गए। लोग सड़क पर आ गए। 108 सेवा का इंतजार हो रहा है लेकिन सेवा देने वाली ही कहीं गायब हैं। आधा घंटा बीत गया और 108 का कोई अता-पता नहीं लगा। अब क्या करें ? सड़क पर तड़पती महिला और टॉ्रच पकड़कर बेबस सी खड़ी महिलाएं। कुछ ना कुछ तो करना ही था। इसलिए महिला की डिलिवरी सड़क पर ही करवाई गई। खुशी मनाइए..क्योंकि उत्तराखंड में सड़क पर टॉर्च की रोशनी में महिला का प्रसव हुआ है।
यह भी पढें - उत्तराखंड से दिल्ली जाने वाले सावधान! ये ढाबे वाला खुलेआम धमकी देता है
शर्म की बात दो ये है कि 108 पहुंच ही गई और वो भी आधे घंटे के बाद । इसके बाद जाकर 108 द्वारा महिला और बच्चे को अस्पताल ले जाया गया। गनीमत ये रही कि जज्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। बकौल सुशील रावत उन्होंने 12 बजकर 30 मिनट पर 108 को फोन कर इस बारे में खबर की थी। अव्यवस्था का आलम ये है कि 108 सेवा 1 बजकर 22 मिनट पर पहुंची। महिला ने एक बजे के करीब पर सड़क पर बच्ची को जन्म दिया। 108 एंबुलेंस को सिर्फ दो किलोमीटर का सफर तय करने में एक घंटे का वक्त लग गया। इनसे तो उम्मीद की जाती है कि ये देवदूत बनेंगे लेकिन हुआ तो कुछ और ही है। इस खबर के सामने आने के बाद राज्य प्रभारी 108 सेवा ने मामले की जांच की बात कही। इंतजार करते हैं कि जांच में क्या निकल कर आता है ।