शहीद मानवेंद्र रावत के गांव में पसरा मातम, मासूम बच्चों ने पूछा ‘आप रोते क्यों हो?’
Jun 14 2018 8:22PM, Writer:कपिल
याद रखिए...अगर आप अपने घरों में चैन की नींद सो रहे हैं, तो सिर्फ इन जवानों की बदौलत। याद रखिए अगर आज देश की सरहतें महफूज हैं तो सिर्फ इन जवानों की बदौलत। ऐसे ही पहाड़ का एक सपूत चला गया। मानवेंद्र सिंह रावत भारत मां की रक्षा के लिए शहीद हो गए। जब मां-पिता ने बेटे के शहीद होने की खबर सुनी तो आंखों में सैलाब उमड़ पड़ा। खबर सुनकर पूरे गांव में मातम छा गया। शहीद मानवेंद्र सिंह रावत 6 गढ़वाल राइफल के वीर सिपाही थे। जम्मू कश्नीर के बांदीपुरा में उन्होंने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया। शहीद मानवेंद्र सिंह रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ ब्लाक के कबिल्ठा गांव के रहने वाले थे। गांव में उनकी मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद मानवेंद्र अपने पीछे बेटी जान्हवी और बेटे अनुराग को छोड़कर चले गए।
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इन दो मासूमों को अब ये नहीं पता कि आखिर पिता कब लौटकर आएंगे। घर में रोते-बिलखते लोगों को देखकर मासूम बच्चे अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर आप रो क्यों रहे हो ? बार बार अपने पिता की फोटो ये बच्चे मोबाइल में देख रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं। पहाड़ का वीर सपूत आतंकियों के साथ लोहा लेते हुए शहीद हो गया। कश्मीर के बांदीपुरा में सेना के जवानों ने 2 आतंकियों को ढेर कर दिया। मुठभेड़ में मानवेंद्र बुरी तरह से घायल हो गए थे। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि शहीद होने से पहले ही उनकी बात अपने परिवार से हुई थी और उन्होंने अपनी मां-पिता का हाल जाना। इसके बाद उन्होंने अपने गांव के बारे में भी पूछा। गुरुवार सुबह उन्होंने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।
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इसके बाद इसकी सूचना घरवालों को दी गई। सूचना मिलने के बाद बाद माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, मायके गई पत्नी को भी वापस कबिल्ठा बुलाया गया। घर-परिवार में सब बेसुध पड़े हैं। शहीद के चाचा दिलवर सिंह रावत ने बताया कि मानवेंद्र बचपन से ही हंसमुख व्यवहार के थे। मानवेंद्र सिंह रावत के दोनों बच्चे जान्हवी और अनुराग घर के माहौल को देखकर अपनी मां, दादा और दादी से बार-बार सवाल पूछ रहे हैं, कि तुम रो क्यों रहे हो ? उधर उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार हर संभव मदद के लिए मानवेन्द्र सिंह रावत के परिवार के साथ है। मानवेंद्र का गांव कबिल्ठा पड़ता है। कबिल्ठा गांव के लिए गुप्तकाशी से पहले एक रास्ता जाता है।आज इस गांव में मातम का माहौल पसरा है।