‘मां मैंने दो आतंकी मार दिए, अब चिंता मत करना’...ये कहकर शहीद हुआ पहाड़ का सपूत
Jun 15 2018 2:37AM, Writer:आदिशा
उत्तराखंड का वो वीर सपूत अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहा था। दिल में मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा उफान मार रहा था। मन में मां-पिता, बच्चों और पत्नी को आखिरी बार देख लेने की बेबसी थी। रात करीब साढ़े आठ बजे मां कमला देवी और पत्नी विनीता देवी से बात हुई तो कहा ‘मां चिंता मत करना, मैंने दो आतंकवादियों को मार गिराया है।’ शहीद मानवेंद्र सिंह रावत का एक ढाई साल का बेटा है, जिसका नाम अनुराग है। पांच साल की बेटी जान्हवी भी है। एक मां है, जिसके आंसू थमने का नाम नहीं रहे, एक पत्नी जिसके लिए ये सब कुछ अप्रत्याशित है और एक पिता हैं जो इस बुढ़ापे में परिवार का सहारा बनेंगे। शहीद के मासूम बच्चों की समझ में ये नहीं आ रहा है कि हुआ क्या है और ये लोग इतना रो क्यों रहे हैं।
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जरा सोचिए वो कैसा वीर रहा होगा जो गोली लगने के बाद भी दो आतंकवादियों को ढेर कर चला गया। जब तक आंखें बंद नहीं हुई और बेहोश होकर जमीन पर नहीं गिरा, तब तक वो लड़ता रहा और आंतकियों की हर चुनौती को स्वीकार करता गया। तब जाकर उस हालत में मानवेंद्र सिंह रावत को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जब अपनी मां से बात की तो कह दिया कि ‘मां चिंता मत करना, मैंने दो आतंकवादी मार गिराए हैं।’ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है कविल्ठा गांव। केदारघाटी को आप वीर सपूतों की घाटी भी कह सकते हैं क्योंकि यहां के कई बेटों ने देश की रक्षा के लिए प्राणों को न्यौछावर किया है। जम्मू- कश्मीर के बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान 6-गढ़वाल राइफल के जवान मानवेंद्र सिंह रावत अपना सर्वोच्च बलिदान दे गए।
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कैसे जीवट और किस मिट्टी के बने हैं ये वीर जवान, जिन्हें अपने शरीर में हो रहे बेपनाह दर्द की कोई चिंता नहीं है और गर्व इस बात का है कि दो आतंकवादियों को मार गिराया। उस मां की कोख सूनी हो गई, लेकिन उस कोख को भी प्रणाम जिसने ऐसे वीर सपूत को जन्म दिया। उस पिता की आशीर्वाद को सलाम, जिसके दम पर देश का ये वीर सपूत मां भारती के लिए कुर्बान हो गया। जिस वक्त ये खबर आई, उस वक्त मानवेंद्र सिंह रावत की पत्नी विनीता देवी फाटा में थीं। 12 साल पहले मानवेंद्र सिंह रावत सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। 6- गढ़वाल राइफल में अपने साथियों के लिए मानवेंद्र सिंह रावत किसी फाइटर से कम नहीं थे। आज ये फाइटर देश की रक्षा के लिए सब कुछ कुर्बान कर गया। शत शत नमन उत्तराखंड के इस वीर सपूत को।