image: Chamoli mythological vedini kund dried

उत्तराखंड से प्रकृति ने दिए भयानक संकेत, पूरी तरह सूखा नंदा देवी का पौराणिक वेदनी कुंड

Jun 28 2018 9:36AM, Writer:आदिशा

नंदा देवी राजजात यात्रा..हर 12 साल में एक बार होने वाली इस यात्रा के दौरान एक खूबसूरत पड़ाव आता है वेदनी बुग्याल। प्रकृति की बेपनाह खूबसूरती के बीच बने इस बुग्याल में ही मौजूद है वेदनी कुंड। बीते साल या यूं कहें कि कुछ महीने पहले भी अगर आप यहां आए होंगे तो आपने इस वेदनी कुंड में पानी देखा होगा। लेकिन अब हम आपको बता देना चाहते हैं कि वेदनी कुंड पूरी तरह से सूख चुका है। वेदनी बुग्याल और वेदनी कुंड से ही नंदा देवी राजजात की प्रथम पूजा होती है। चमोली जिले में समुद्रतल से 13500 फीट की ऊंचाई पर स्थित वेदनी कुंड का अपना ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है।लेकिन अब इस कुंड पर खतरा साफ दिख रहा है। इस कुंड का पानी फिलहाल पूरी तरह सूख चुका है। दुनियाभर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए ये सबसे बुरी खबर है। आइए जानते हैं कि इस बारे में वैज्ञानिकों का क्या कहना है।

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कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि वेदनी कुंड के जलविहीन होने की सबसे पहली वजह है ग्लोबल वार्मिंग। कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि बीते कुछ सालों में भूस्खलन के चलते पानी लगातार रिसता रहा है और इस वजह से वेदनी कुंड सूख गया है। वहीं वन विभाग का कहना है कि इस बार कम बर्फबारी हुई और इस वजह से वेदनी कुंड में पानी की कमी आई है। वेदनी बुग्याल नंदा देवी और त्रिशूल पर्वत श्रृखलाओं के बीच स्थित है। वाण गांव से 13 किमी की दूरी पर मौजूद इस बुग्याल में नेदनी कुंड करीब 15 मीटर व्यास में फैला हुआ है। चमोली जिले के साथ साथ ये कुंड उत्तराखंड के इतिहास में भी विशेष स्थान रखता है। नंदा देवी राजजात की पहली पूजा और नंदा लोकजात की पूजा का समापन वेदनी कुंड में ही होता है। इस कुंड में स्नान करने के बाद मां नंदा को कैलास विदा किया जाता है।

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अब इस कुंड के सूखने से पर्यावरण प्रेमी गहरी चिंता में हैं। बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ का कहना है कि इस साल चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में कम बर्फबारी हुई। इसका असर वेदनी कुंड पर भी देखने को मिला है। पहले ठीकठाक बर्फबारी होने की वजह से वेदनी कुंड गर्मियों में भी पानी से भरा रहता था। लेकिन इस बार तो बरसात भी आ गई और वदनी कुंड सूखा पड़ा है। बर्फबारी होने के कारण वेदनी कुंड गर्मियों में भी पानी से भरा रहता था। हालांकि, बरसात के दौरान फिर स्थिति सामान्य हो जाएगी। पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि पर्यावरण असंतुलन ही इसका सबसे बड़ा कारण है। कुंड के सूखने का असर वेदनी बुग्याल की जैव विविधता पर पड़ेगा, ये बात भी तय है। सवाल ये भी है आखिर प्रकृति से खिलवाड़ कब तक ?


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