Video: इस कौथिग में जिंदा है पहाड़ की संस्कृति, पारंपरिक परिधान और तांदी नृत्य देखिए
Jun 28 2018 11:20AM, Writer:कपिल
उत्तरकाशी जिले की यमुनाघाटी अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। यहां सुप्रसिद्ध डांडा देवराणा मेले का आयोजन हो रहा है। इस मेले में यमुनाघाटी के ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरकाशी जिले के लोग देवराणा नामक स्थान पर एकत्र होकर भगवान रूद्रेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं। ये मेला उत्तरकाशी जिले के सुदूरवर्ती धारी कफनोल क्षेत्र में आयोजित किया जाता हैं। इस मेले का आयोजन स्थान देवदार के घने जंगलों के बीच करीब दो हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित देवराणा में होता है। जंहा साल में एक बार ही श्री रूद्रेश्वर महाराज के दर्शन के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। इसी दिन भगवान अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देते हैं। घाटी के सभी क्षेत्रों से लोग अपने पारम्परिक परिधानों को पहने तांदी नृत्य के साथ मेले में अपनी उपस्थिति देते हैं और भगवान का आशीर्वाद लेते हैं।
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इस मेले से जुड़ी कुछ प्रथाएं भी हैं। कहते हैं कि भगवान रूद्रेश्वर महाराज के मोरू यानी (मूर्ति ) को रथ पर बैठाया जाता है। इसके बाद गंगा जल और दूध से अभिषेक किया जाता है। पहले आप ये तस्वीरें देखिए।
इस दौरान ही भक्त भगवान के साक्षात दर्शन कर पाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा के दर्शन मात्र से ही कष्ट दूर हो जाते है। इस मंदिर के अंदर आप शिवलिंग के साथ -साथ पंचदेव के दर्शन भी कर सकते हैं।
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जिस में श्री रूद्रेश्वर महादेव की मूर्ति,बाबा बौखनाथ,छेलेश्वर महादेव, महासू महाराज, धर्मराज युधिष्ठर और नाटरी के मूर्तियो के दर्शन कर अपनी मनोकामना फल प्राप्त कर सकते है। लोगों को अपने सगे संबंधियों और मित्रों को एक स्थान पर मिलाने के लिए आज भी यमुनाघाटी के प्रत्येक गांव में मेलों का आयोजन किया जाता है। ये ही वजह है कि उत्तराखंड में सबसे कम पलायन यमुना घाटी में हुआ है। इस मेले में लोग जमकर तांदी नृत्य करते हैं। ये वीडियो भी देख लीजिए।