उत्तराखंड के लोग जीव-जंतुओं के संरक्षक घोषित हुए, हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
Jul 5 2018 2:11PM, Writer:कपिल
क्या आपने देश के किसी राज्य में ऐसा ऐतिहासिक फैसला देखा है, जहां हाईकोर्ट द्वारा इंसानों को ही जीव-जंतुओं का कानूनी संरक्षक घोषित कर दिया गया हो ? वैसे हमारी जानकारी में ऐसा अब तक तो नहीं है लेकिन उत्तराखंड में ये बड़ा फैसला सुनाया गया है। जी हां उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जल, थल, आकाश में रहने वाले जीव जंतुओं को कानूनी दर्जा प्रदान कर दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट द्वारा उत्तराखंड के नागरिकों को जानवरों का संरक्षक घोषित कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नागरिकों की तरह ही जानवरों के लिए भी अधिकार, कर्तव्य और जिम्मेदारियां हैं। अब आपका ये भी जानना जरूरी है कि आखिर ये मुद्दा हाईकोर्ट में उठा कैसे ? उत्तराखंड के सीमांत गांव बनबसा के नारायण दत्त भट्ट ने हाईकोर्ट में ये जनहित याचिका डाली थी।
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नारायण दत्त भट्ट ने जनहित याचिका में लिखा था कि बनबसा से महेंद्रनगर की दूरी 14 किलोमीटर है। इस रास्ते पर घोड़ा, तांगा, बुग्गी और भैंसा गाड़ियां चलती हैं। नारायण दत्त भट्ट ने लिखा था कि इन बेजुबानों के चिकित्सकीय परीक्षण और टीकाकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। ये याचिका 2014 में दायर की गई थी। अबू कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि नगरपंचायत बनबसा द्वारा घोड़े-खच्चरों का परीक्षण हर हाल में करवाया जाए। इसके साथ ही सीमा पर एक पशु चिकित्सा केंद्र खोला जाए। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही कहा है कि उत्तराखंड के हर शख्स की जिम्मेदारी है कि वो जानवरों के संरक्षक बनें। पंतनगर विश्वविद्लय के कुलपति को निर्देश देकर कहा गया है कि पशुपालन विभाग की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करें।
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ये कमेटी पशु क्रूरता अधिनियम से संबंधित मामलों में रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद कुलपति द्वारा मुख्य सचिव को ये रिपोर्ट भेजी जाएगी। कोर्ट ने सरकार को आदेश देकर कहा है कि पशुओं पर अधिक भार ना लादा जाए, इस बात को सुनिश्चित करें। जानवरों से अधिक और न्यूनतम तापमान में काम ना करवाए जाएं। नगर पालिकाओं को आदेश दे दिए गए हैं कि जानवरों से भार ढोने वाले मामलों पर नजर रखी जाए। इसके अलावा तांगा और घोड़ा गाड़ियों पर रिफलेक्टर लगाने के निर्देश दे दिए गए हैं। हर नगर निकाय को निर्देश दिए गए हैं कि जानवरों के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएं। पशु चिकित्सकों को तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं और कहा गया है कि वक्त पर बीमार जानवरों का उपचार किया जाए। अगर जानवर को डॉक्टर के पास नहीं ले जाया गया तो डॉक्टर खुद उसका उपचार करने के लिए जाए।