Video: पहाड़ में मर गया सिस्टम ..आधे प्रसव में तड़पती मां को किया रेफर, मिली दर्दनाक मौत!
Jul 5 2018 4:48PM, Writer:कपिल
ये पहाड़ की नियति है ? ये पहाड़ से किए गए वादे हैं ? उन वादों और दावों का अंतिम संस्कार उसी वक्त हो गया, जब प्रसव पीड़ा के दर्द से कराहती एक मां की आंखें हमेशा के लिए बंद हो गई। बेशर्मी और बेरहमी देखिए इन सफेदपोश डॉक्टरों की...पेट से बच्चा बाहर आते ही महिला को दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया। उस मां की एक 7 साल की बच्ची पहले से है,वो बच्ची भी पहाड़ में मिली ऐसी हाईटेक स्वास्थ्य सुविधाओं को जिंदगी भर कोसेगी। रुद्रप्रयाग के जिला अस्पताल में जो हुआ, वो लाचार और अर्थी पर पड़ी स्वास्थ्य सेवा का जीता जागता उदाहरण है। रुद्रप्रयाग जिले के कांडा-सिमतोली के रहने वाले सुभाष चंद्र थपलियाल जसोली में एक दुकान चलाते हैं। उनकी पत्नी आशा देवी अपनी सात साल की बेटी के साथ पुनाड़ में किराए के मकान पर रह रही थी।
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बुधवार की सुबह आशा देवी को प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद परिजनों द्वारा नौ बजे आशा देवी को जिला अस्पताल लाया गया। आरोप है कि डॉक्टर्स ने पहले कहा कि 11 बजे डिलिवरी होगी। इसके बाद 2 बजे, 5 बजे, 7 बजे, 9 बजे और फिर रात 11 बजे का वक्त दिया गया। एक तरफ दर्द से बिलखती एक मां और दूसरी तरफ बैचेन और परेशान परिजन। रात को 11.30 बजे के करीब परिजनों से अचानक कह दिया गया कि महिला की तबियत बिगड़ गई है। ब्लीडिंग नहीं रुक रही और उसे हायर सेंटर ले जाओ। अस्पताल प्रबंधन द्वारा आनन फानन में कागजी कार्रवाई पूरी की गई और महिला को श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर किया गया। महिला के देवर मनोज थपलियाल ने मीडिया से बताया है कि रुद्रप्रयाग अस्पताल में प्रसव होना शुरू हो गया था। बच्चे का सिर बाहर आने लगा था।
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इस सबके बाद भी महिला को रेफर किया गया। रात के पौने एक बजे परिजन महिला को लेकर बेस अस्पताल पहुंचे। दस मिनट बाद ही वो इस दुनिया में नहीं रही। ये कैसी बेबसी और लाचारी है, जो पहाड़ के लोगों के भाग्य में लिख दी गई है। परिजन शव लेकर जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया। हैरानी की बात है कि सुबह 9 बजे लाई गई महिला की सुध रात के 11 बजे तक नहीं ली गई और उसके बाद उसे रेफर करने के लिए कहा जाता है। इससे शर्मनाक हालत क्या होगी ? डीएम मंगेश घिल्डियाल से कुछ उम्मीदें बंधी हैं। उनका कहना है कि एसडीएम सदर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है, जिसमें सीएमओ और एसीएमओ को शामिल किया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद मामले में कार्रवाई होगी। यहां सवाल ये भी है कि क्या अब देर नहीं हो गई ? क्या ये सिस्टम की मौत नहीं है ? क्या ये पहाड़ के बेबसी नहीं कि एक अदद अस्पताल और कुछ अच्छे डॉक्टर्स भी नसीब ना हों ?