image: Story of harender singh payal of uttarakhand pauri garhwal

देवभूमि का भागीरथ: हरेंदर पयाल ने वो कर दिखाया, जो सरकारें 71 साल में नहीं कर पाईं

Jul 5 2018 6:15PM, Writer:कपिल

ऐसे हिम्मतवालों के दम पर है उत्तराखंड। जब सिस्टम से आस टूट जाए तो हाथ पर हाथ रखकर चुप नहीं बैठा जाता, काम करमना पड़ता है और अपने काम से सिस्टम को सबक सिखना पड़ता है। पहाड़ के लोग कमजोर नहीं हैं, वो जानते हैं कि कैसे अपनी जिंदगी को सही ढर्रे पर लाना है। ऐसा ही एक नाम है हरेंदर सिंह पयाल। उत्तराखंड के यमकेश्वर प्रखंड के जुलेड़ी ग्राम सभा में स्थित ढोसन गांव के हैं हरेंदर सिंह पयाल। यहां के लोग कभी बूंद बूंद पानी के लिए तरसते थे। आलम ये था कि पानी की भयंकर किल्लत की वजह से लोग महीने में एक बार ही नहाते थे। आजादी के बादे से 71 साल होने का आ गए लेकिन इस गांव के लोगों की परेशानी सरकार के कानों तक नहीं पहुंची। हर सरकार से पीने के पानी की गुहार लगाई लेकिन पानी तो नहीं आता। हां मांग पत्रों में सफर जरूर लंबा हो जाता।

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बस फिर क्या था। सरकार का मुंह ताकने के बजाय पूरे गांव ने भागीरथ तप शुरू कर दिया। इस गांव के हरेंदर सिंह पयाल ने आवाज उठाई तो नवयुवक मंगल दल ढोसन के युवाओं का साथ मिला। हरेंदर सिंह पयाल इस समिति के अध्यक्ष भी हैं। 200 लोगों की आबादी वाले इस गांव में 15 मार्च से गजब नज़ारा देखने को मिला। पांच सौ मीटर नीचे प्राकृतिक स्रोत से गांव के 40 परिवार अपने गांव तक पानी पहुंचाने में सफल रहे हैं। गांव में ही पानी का संरक्षण के लिए बड़े बड़े टैंक बनाए गए हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई, जिसमें दो महीने का वक्त लगा। कहते हैं जब कुछ करने का हौसला हो तो हर जगह से मदद मिलती है। इस काम के लिए अलग अलग जगह से चंदा इकट्ठा किया गया और 10 लाख रुपये जमा हुए। अब जरा इन गांव वालों से पूछिए कि मेहनत का मजा क्या होता है।

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गांववालों को मिलने वाला पानी करीब पांच हजार लीटर प्रति घंटा होगा। इसके अलावा पानी के जरिए स्वरोजगार उत्पन्न होगा। गांव की 10 हेक्टेयर भूमि में बागवानी एवं आठ हेक्टयर भूमि में सब्जी का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा अब इस गांव को देखने के लिए अलग अलग जगहों से लोग आ रहे हैं। लोग कहते हैं कि हरेंदर पयाल ने गांव को स्वर्ग जैसा बना दिया है। हरेंदर पयाल अब खुद भी मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और गौ पालन कर रहे हैं। हरेंदर पयाल का कहना है कि गांव में पानी पहुंचाया गया तो पलायन पर काफी हद तक रोक लग गई। जरा सोचिए पहाड़ का जो गांव कभी सूखा था, वो गांव अब लहलहा रहा और हर कोई एक बार इस गांव को देखना चाहता है। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से हरेंदर सिंह पयाल को सलाम।


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