image: Dobra chaanthi bridge construction work to complete this year

उत्तराखंड को इस साल मिलेगा डोबरा-चांठी पुल, 12 साल का इंतजार खत्म होगा !

Jul 21 2018 6:30PM, Writer:कपिल

एक अच्छी खबर है। उत्तराखंड में 12 सालों से जिस पुल के बनने का इंतजार हो रहा है, बताया जा रहा है कि इस साल दिसंबर तक वो पुल बनकर तैयार हो जाएगा। जी हां हम बात कर रहे हैं डोबरा चांठी पुल की। वो पुलिस जिसने इंतजार और सहनशीलता की सारी हदों को पार कर लिया है। वक्त पर वक्त बीतता गया, कभी डिजायन फेल, कभी वैज्ञानिक फेल, कभी खर्चा नहीं, कभी सरकार बदलने का वक्त..12 साल से टिहरी गढ़वाल के साथ साथ उत्तराखंड की जनता जिस वैभवशाली पुल के बनने के सपने देख रही थी, उम्मीद है कि इस साल दिसंबर तक इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। अगर ये पुल बनकर तैयार होता है तो इंजीनियरिंग की और टेक्नोलॉजी की एक बड़ी मिसाल पेश करेगा। सभी काम पूरे कर लिए गए हैं और पुल को जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 30 मीटर पुल जोड़ा जा चुका है।

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निर्माण कार्य खत्म करने का लक्ष्य दिसंबर 2018 तक रखा गया है। 12 सालों से बन रहे डोबरा चांठी पुल के पैनलों को जोड़ने में चार महीने का वक्त लगने की संभावना है। इस पुल में करीब सात सौ मीटर कैटवाक का काम हो चुका है। काम की रफ्तार को देखकर लग रहा है कि 2006 से बन रहे इस पुल के निर्माण में आ रही दिक्कतें धीरे-धीरे दूर हो रही हैं। इस पुल की लंबाई 760 मीटर होगी। प्रतापनगर और थौलधार को जोड़ने के लिए इस पुल का निर्माण चल रहा है। झील के ऊपर 850 मीटर की ऊंचाई पर मुख्य पुल को जोड़ने क लिए 20-20 टन के 24 रोप को आर-पार करवाना सबसे बड़ी चुनौती थी। ये काम 5 महीने में पूरा हो पाया। इस चुनौती को पार करने के बाद अब पुल के पैनल जोड़ने का काम हो रहा है। इतना समझ लीजिए कि अगर ये काम पूरा हो गया तो 3 लाख से ज्यादा की आबादी को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 100 किलोमीटर की लंबी दूरी नहीं नापनी पड़ेगी।

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पुल के लिए 20-20 टन के 24 रोप लग गए। 5-5 मीटर के फासले पर झील की तरफ क्लैंप, सस्पेंडर का काम भी पूरा हो गया। डोबरा की तरफ 260 मीटर की आरसीसी और चांठी की तरफ 25 मीटर एप्रोच पुल का काम पूरा हो चुका है। कार्य पूरा हो गया। इसके साथ ही 58-58 मीटर के चार टॉवर भी यहां तैयार किए गए हैं। अच्छी बात ये भई है कि यहां 700 मीटर कैटवॉक का काम भी खत्म हो गया है। साल 2012 तक इस पुल पर करीब 1 अरब 32 करोड़ खर्च किए गए थे लेकिन इस दौरान इसका डिजायन फेल करार दिया गया। IIT रुड़की और IIT कानपुर द्वारा इस पुल का डिजायन बनाया गया था। इसके बाद विदेशी कंसल्टेंट की मदद से इस पुल पर निर्माण कार्य शुरू किया गया। साल 2015 में एक अरब 74 करोड़ रुपये पुल के लिए फिर से स्वीकृत हुए और तब जाकर इस पुल का निर्माण फिर से शुरू करवाया गया।


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