पहाड़ की शेरनी…अपनी दादी को बचाने के लिए भालू से जा भिड़ी थी दीपिका
Jul 24 2018 6:39PM, Writer:कपिल
एक सच्ची कहानी जो आपके रौंगटे खड़े कर देगी। पहाड़ की बेटियां किन परिस्थियों में पलकर बड़ी होती हैं, इसका अंदाजा आज आपको भी होगा। सवाल तोे ये है कि क्या बड़े बड़े शहरों के बड़े बड़े न्यूज चैनलों को ऐसी कहानियां नहीं दिखती? समाज के लिए प्रेरणादायक कहानियां ही तो समाज को बदलती हैं। हमारा मानना है कि कर्णप्रयाग की दीपिका की कहानी हिंदुस्तान की हर बेटी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। जरा सोचिए जंगल में अपनी दादी के साथ घास काटने गई दीपिका भालू से ही जा भिड़ी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि भालू उसकी दादी पर हमला कर चुका था। ये बात 22 मई साल 2014 सुबह के करीब 9.30 बजे की है। बृहस्पतिवार का दिन था और सिंद्रवाणी गांव की दीपिका अपनी 60 साल की दादी के साथ मवेशियों के लिए चारा लेने गई थी।
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दीपिका की दादी खेत के किनारे ही घास काटने में व्यस्त थीं, तो दीपिका एक पेड़ पर चढ़कर घास इकट्ठा कर रही थी। अचानक एक भयंकर भालू आ गया और दीपिका की दादी पर हमला कर दिया। नज़ारा देखकर दीपिका एक बार के लिए सहम गई थी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। अपनी दादी को भालू के चंगुल से छुड़ाने के लिए दीपिका ने पेड़ से छलांग लगा दी। हाथ में दरांती पकड़ी और भालू पर वार करने लगी। भालू का ध्यान दादी से हटा औपर दीपिका की तरफ चला गया। अब भालू और दीपिका के बीच मानों जंग सी शुरू हो चुकी थी। भालू के वार से दीपिका घायल हो चुकी थी लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वो लगातार दरांती से भालू पर वार करती रही और चिल्लाती रही। इस बीच कुछ ग्रामीणों को दीपिका की आवाज सुनाई दी। देखते ही देखते गांव के लोग वहां पहुंचे और ये देखकर भालू मौके से भाग उठा।
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उस वक्त दीपिका को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दीपिका का कहना था कि उसे खुद से ज्यादा अपनी दादी की चिंता थी। एक तरफ शहरों में रिश्तों की कोई कीमत नहीं रह गई, तो दूसरी तरफ पहाड़ में रिश्ते ही सब कुछ हैं। आपको याद होगा कि ऐसी ही घटना टिहरी में भी हुई थी, जब एक लड़के ने अपने परिवार को आदमखोर तेंदुए से बचाया था। वो अपनी मां और भाइयों के लिए आदमखोर से ही लड़ पड़ा था। बात ये है कि पहाड़ में पैदा हुए बच्चों के दिल में हिम्मत भी होती है और साहस भी। इसलिए उन्हें कोई भी काम मुश्किल नहीं लगता। दीपिका की कहानी सुनकर उस वक्त भी कई लोगों के दिल में उसके लिए सम्मान जाग उठा था। पहाड़ की बेटी की इस बहादुरी को सलाम।