पहाड़ का बेमिसाल किसान..शहर छोड़कर गांव लौटा, एक-एक पौधे से उगाए 15-15 किलो टमाटर
Jul 31 2018 2:19PM, Writer:कपिल
हाथ पर हाथ धरे बैठने से क्या फायदा ? किस्मत को कब तक कोसते रहें? कब तक ये कहते रहें कि ‘पहाड़ में कुछ नहीं हो सकता’? जिन लोगों ने अपनी सोच बदली, वो लोग सफलता की सीढ़ियां चढ़ते रहे। मेहनत इतनी खामोशी से की कि सफलता शोर मचा रही है। ऐसे हैं चमोली जिले के थराली के रहने वाले कलम सिंह रावत। कलम सिंह रावत की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। कलम सिंह रावत आज हर साल लाखों की सब्जियां बाजार में बेच रहे हैं। बचपन में वो घर छोड़कर शहर की ओर भाग गए थे। कई सालों तक वो लुधियाना में एक हौजरी फैक्ट्री में काम करते रहे। शहर में काम तो करते रहे लेकिन हर बार उन्हें अपना गांव याद आता था। अपने गांव में अपने घर की चिंता और अपनी जमीन की चिंता उन्हें इतना परेशान करती रही कि एक दिन वो लुधियाना में सब कुछ छोड़कर वापस अपने गांव आ गए।
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गांव वापस आए तो देखा कि दो नाली का खेत बंजर पड़ा है। बस फिर क्या था...कलम सिंह रावत इस जमीन को हरा-भरा बनाने में जुट गए। जब स्थानीय लोगों ने ये देखा, तो कलम सिंह रावत को ताने देने लगे। कहने लगे कि ‘शहर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर गांव आ गया, पत्थरों में अपना सिर फोड़ रहा है’। लेकिन कहते हैं कि ‘खुद पर भरोसा हो तो ऊपरवाला भी आपका साथ देता है।’ कलम सिंह रावत अपने लक्ष्य में जुटे रहे। जब लोग रात में सोते थे, तो कलम सिंह रावत धारे से पानी लाकर अपने खेत को सींचते थे।
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आज कलम सिंह रावत के खेत में आपको पहाड़ की खेती का नया रूप नया अंदाज दिखेगा। वो पॉली हाउस में सब्जियां उगा रहे हैं। हैरानी की बात तो ये है कि वो टमाटर के एक-एक पौधे से 15 से 20 किलो तक टमाटर उगा रहे हैं। पहाड़ के टमाटर की डिमांड बढ़ने लगी है। कलम सिंह रावत हर साल लाखों की सब्जियां बाजार में बेचते हैं और कहते हैं कि ये बहुत कम है। उन्होंने यू-ट्यूब पर देखा है कि लोग एक पौधे से 30 किलो तक टमाटर उगा सकते हैं। ये ही कलम सिंह रावत का लक्ष्य है। आज कलम सिंह रावत समाज क लिए प्रेरणा बन गए हैं।