image: ukhimath uttarakhand doctor chaube sets example of humanity

पहाड़ में ऐसे डॉक्टर भी हैं..आपदा के बीच गर्भवती मां को दी नई जिंदगी..बच्चा भी स्वस्थ है

Jul 31 2018 8:56PM, Writer:शैलेश

डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। देवभूमि में एक बार फिर ये मिसाल देखने को मिली है। उत्तराखंड के ऊखीमठ में एक बच्चे को नयी जिंदगी दी। दरअसल रुद्रप्रयाग जिले का गौरीकुंड हाईवे भारी बारिश के चलते ब्लाक हो गया था। रात को 12:30 बजे भारी बारिश के बीच सड़क के किनारे एम्बुलेंस में ही प्रसव कराने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। रुद्रप्रयाग गौरीकुंड राजमार्ग पर भारी बारिश के चलते मलबा गिरा हुआ था, वहीं थोड़ी ही दूरी पर प्रसव कराने में डॉक्टर की जान को भी खतरा था और कुछ देर और होती तो माँ और बच्चे की जान भी जा सकती थी। ऐसी स्थिति में उखीमठ स्वस्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर चौबे ने न केवल प्रसूता की जान बचायी बल्कि एक नन्ही सी जान को भी नया जीवन दे दिया। सरकारी अस्पताल उखीमठ में तैनात डॉक्टर चौबे ने अपने फर्ज से ज्यादा इंसानियत की जो मिसाल पेश की है, उसे प्रसूता के परिजन ताउम्र याद रखेंगे। दरअसल ऊखीमठ नगर पंचायत के गांधीनगर वार्ड की रश्मि देवी का प्रसव होने को था, जिसे देखते हुए परिजनों ने प्रसूता को पास के ही ऊखीमठ अस्पताल में भर्ती किया था।

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doctor sachin chaube ukhimath uttarakhand
अस्पताल में मौजूद डॉ. प्रियशी रावत ने महिला का जरुरी उपचार किया। 11 बजे से पहले तक प्रसूता की स्थिति ठीक थी, पर 11 बजे अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ० सचिन चौबे ने रश्मि की प्रसव प्रोग्रेस में गिरावट देखी। डॉ चौबे ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे रेफर करने का निर्णय लिया और तुरंत ही अस्पताल की एंबुलेंस से रश्मि को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया। महिला की नाजुक स्थिति को देखकर परिवार वालों के साथ डॉ. चौबे भी एंबुलेंस में सवार हो गये।

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रात 11:30 पर एंबुलेंस रास्ते में ही पड़ने वाली एक जगह भीरी तक पहुंची। भीरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग में भारी बारिश के चलते मलबा आने से रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे बंद हो गया था। रश्मि की नाजुक हालत को देखते हुए वापस जाने को जैसे ही ये लोग तैयार हुए, गर्भवती की तबियत बहुत बिगड़ गयी। रश्मि को प्रसव-पीड़ा शुरू हो गयी और वो दर्द से चिल्लाने लगी। इस पर डॉ. चौबे ने एंबुलेंस को सड़क किनारे खड़ा करने को कहा और वहीं प्रसव कराने का निर्णय लिया। डॉ सचिन चौबे ने रात को 1:30 बजे भारी बारिश के बीच एम्बुलेंस में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करवाया। इसके साथ ही डॉ चौबे ने एक मिसाल कायम कर दी... ऐसी मिसाल जो आने वाले कई समय तक इंसानियत की प्रेरणा देती रहेगी। राज्य समीक्षा ऐसे चिकित्सकों को नमन करता है।


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