गढ़वाल राइफल के सपूत को सच्ची श्रद्धांजलि, ऐसी पहल उत्तराखंड में हर जगह होनी चाहिए
Aug 3 2018 2:54PM, Writer:कपिल
जिन वीरों ने सीमा पर रहकर देश के लिए कुर्बानी दी, अगर उन वीरों की यादों को जिंदा रखने के लिए समाज की तरफ से ही कुछ बेहतरीन पहल की जाएं तो अच्छा है। ऐसे कामों की हमेशा ही सराहना होनी चाहिए। हाल ही में उत्तराखंड ने एक और वीर सपूत खो दिया था। जम्मू में आतंकी मुठभेड़ में गोली लगने से मानवेंद्र सिंह रावत वीरगति को प्राप्त हुए थे। उखीमठ ब्लॉक के कविल्ठा,कोटमा निवासी शहीद मानवेन्द्र रावत की ड्यूटी जम्मू-कश्मीर के बांदीपूरा बॉर्डर पर लगी थी। रात में अचानक आतंकियों ने घुसपैठ करने की कोशिश तो, सेना के जवाब एक्शन में आ गए। इस दौरान आतंकियों से लोहा लेते वक्त मानवेन्द्र को भी गोली लगी। गोली लगने से वो बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। इस जख्मी हाल में मानवेंद्र सिंह रावत के दिमाग में सबसे पहले अपने परिवार का ख्याल आया।
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शहीद मानवेंद्र सिंह रावत 6 गढ़वाल राइफल के वीर सिपाही थे। वो अपने पीछे बेटी जान्हवी और बेटे अनुराग को छोड़कर चले गए। इसके बाद पूरे उत्तराखंड ने शहीद मानवेन्द्र सिंह रावत को नम आंखों से आखिरी विदाई दी थी। अब शहीद मानवेन्द्र सिंह रावत की यादों को अपने बीच जिंदा रखने के लिए राजकीय इंटर कॉलेज कोटमा में एक अच्छी पहल की गई है। इस विद्यालय में सर्वसम्मति से ये फैसला लिया गया है कि विद्यालय का नाम बदलकर शहीद मानवेन्द्र सिंह रावत के नाम पर हो। अब एक पत्र अधिकारियों को भेजा जाएगा। मानवेन्द्र सिंह रावत को आतंकी मुठभेड़ में गोली लग गई थी और वो बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। जिस दौरान अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, उन्होंने अपने परिवार से आखिरी बार बात की थी और अपने घर-गांव का हाल पूछा था।
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इसके बाद उन्होंने इलाज के दौरान ही दम तोड़ दिया था। पहाड़ के इस वीर सपूत को हमेशा हमेशा के लिए याद रखने के लिए हुई ये पहल शानदार है। शहादत का सम्मान बेहद जरूरी है और इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। ये वो वीर सपूत ही हैं, जिनकी बदौलत हम चैन की सांस ले पाते हैं। ये ही वो वीर हैं, जिनकी बदौलत हम खुद को महफूज़ महसूस करते हैं। ऐसे में इन वीरों की यादों को अपने बीच जिंदा रखना बेहद जरूरी है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी इनकी कुर्बानियों के बारे में जानकारी हो सके। जैसी पहल स्थानीय लोगों और राजकीय इंटर कॉलेज कोटमा के शिक्षकों के द्वारा की गई है, अगर ऐसी ही पहल उत्तराखंड के गांव गांव में हो, तो शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी। उत्तराखंड के इस लाल को राज्य समीक्षा का शत शत नमन।