पहाड़ का बेमिसाल कलाकार..दुबई छोड़कर गांव लौटा, अपने हुनर से बनाई अलग पहचान
Aug 4 2018 3:06PM, Writer:कपिल
कला...जो बेजान सी चीज में जान डाल दे। उस कला की जितनी भी तारीफ करें उतना कम है। जो तस्वीरें हम आपको दिखा रहे हैं, उन्हें ज़रा गौर से देखिए और सोचिए..आखिर किस हुनरमंद ने पहाड़ की पारंपरिक शैली को जिंदा रखा है ? पानी की गागर से लेकर पहाड़ी घर और तिबारी तक। ढोल दमाऊं से लेकर केदारनाथ की खूबसूरती, हर कला में बेजान पड़ी लकड़ियों में इस लड़के ने जान फूंक दी है। इनका नाम है दिनेश लाल। टिहरी के रहने वाले दिनेश लाल वो शख्स हैं, जिन्होंने गरीबी का क्रूर चेहरा देखा लेकिन हारे नहीं। इसके बाद भी एक अच्छी ज़िंदगी के लिए संघर्ष करते रहे। आज दिनेश लाल अपने हाथ और हुनर से लकड़ी को ऐसी शक्ल देते हैं कि देखने वाले दंग जाएं। दिनेश लाल टिहरी गढ़वाल के जाखणखाल के रहने वाले हैं।
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दिनेश लाल दुबई में एक होटल में नौकरी करते थे लेकिन तबीयत नासाज होने की वजह से अपने पहाड़ वापस आ गए। 3 साल तक उनकी तबियत खराब रही। बीमारी की वजह से घर के हालात ऐसे हो गए थे कि पूरा परिवार कर्ज के बोझ तले दब गया था। बताया जाता है कि एक बार उनके छोटे बेटे ने उनसे रिमोट वाली गाड़ी मांगी। इतने पैसे तो नहीं थे कि बच्चे की इच्छा पूरी कर पाएं लेकिन बच्चे का दिल दुखाना भी ठीक नहीं था। इसलिए दिनेश लाल एक बेकार पड़ी लकड़ी से कार बनाकर बच्चे को दे दी। बच्चे को मनपसंद खिलौना मिला और दिनेश को आइडिया मिला। धीरे धीरे दिनेश लाल ने लकड़ी तराशना शुरू कर दिया। अपने हाथ से दिनेश ने क्या बेमिसाल चीजें बनाई, जरा ये देखिए।

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पूरा गांव दिनेश लाल के हुनर की तारीफ करने लगा और उन्हें इस काम के लिए प्रेरित किया जाने लगा। पहाड़ की पारंपरिक शैली वाले इस घर तिबारी को दिनेश ने ही बनाया है। कितनी मेहनत और कितने खूबसूरती से इसे तैयार किया गया होगा, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। टिहरी डीएम द्वारा दिनेश को इस काम के लिए सम्मानित किया जा चुका है।

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धीरे धीरे दिनेश के पास काम आ रहा है और वो अपनी मेहनत से बेमिसाल कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। लेकिन अभी मुकम्मल जगह पर वो नहीं हैं। ऐसी कला को एक बड़ा मंच मिलना चाहिए, जिससे दुनिया उत्तराखंड की पारंपरिक शैली को जान सके। राज्य समीक्षा की टीम का दिनेश लाल के हुनर और मेहनत को सलाम। इसी तरह काम करते रहिए, सफलता का शिखर आपका इंतजार कर रहा है।