image: Great work in timli school of uttarakhand

पहाड़ में ऐसे स्कूल भी हैं…यहां छात्र अब अतंरिक्ष यात्रियों से बात करेंगे, देशभर में तारीफ

Aug 4 2018 7:58PM, Writer:कपिल

अगर आपको लगता है कि पहाड़ में शहर से बेहतर शिक्षा की सुविधाएं नहीं हैं, तो एक बार फिर से सोच लीजिए...शायद आप गलत हों। ये बात तो आपको पता ही होगी कि पहाड़ों में ही देश के कुछ टॉप स्कूल भी हैं, जहां शिक्षा का स्तर हर लिहाज में शहरों से बेहतर है। ऐसा ही एक स्कूल है तिमली विद्यापीठ। पौड़ी गढ़वाल में स्थित इस स्कूल के बारे में जितनी तारीफ करें उतना कम है। इस स्कूल में छात्र तकनीकि और कंप्यूटर शिक्षा से रू-ब-रू तो हो रहे हैं, साथ ही सबसे खास बात ये है कि अब ये छात्र अंतरिक्ष यात्रियों से बात करेंगे। हुई ना गजब की बात! पहाड़ों में रहने वले छात्र अब अंतरिक्ष विज्ञान और पृथ्वी के बारे में अंतरिक्ष यात्रियों से ही सवाल जवाब करेंगे। तिमली विद्यापीठ में 5 सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों के 15 छात्रों को ये मौका मिलेगा।

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येे कार्यक्रम 27 अगस्त से 2 सितंबर के बीच आयोजित किया जाना है। इसे लेकर तिमली विद्यापीठ के संस्थापक आशीष डबराल ने कुछ खास बातें बताई हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में टेक्नोलॉजी और साइंस के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से ये कार्यक्रम किया जा रहा है। एआरआईएसएस और एचएएल स्काउट्स ग्रुप एमेच्योर रेडियो क्लब के मदद से ये कार्यक्रम हो रहा है। इस कार्यक्रम में छात्रों को करीब 10-12 मिनट अंतरिक्ष यात्रियों से बात करने का मौका मिलेगा। यहां छात्र अंतरिक्ष यात्रियों से अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में खास जानकारियां ले सकेंगे। छात्रों से कौन कौन वैज्ञानिक बात करेंगे, ये 15 अगस्त तक तय हो जाएगा। आशीष डबराल वो चेहरा हैं, जिन्होंने तिमली विद्यापीठ में एक असाधारण तरीके से बदलाव किया है।

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आशीष डबराल ने दादा ने 1882 में ये स्कूल खोला था। बीच में तो ये स्कूल ठीक ठाक चला लेकिन एक वक्त ऐसा आया कि पलायन की वजह से यहां सिर्फ 3 छात्र रह गए। इस स्कूल को तिमली विद्यापीठ नाम दिया गया है। आशीष ने मन में संकल्प लिया कि चाहे कुछ हो जाए, इस स्कूल के सम्मान को एक बार से जीवित करेंगे।उन्होंने स्कूल को ऑनलाइन जोड़ने के लिए इग्लैंड से मदद ली। कुछ संस्थाएं उनके स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना चाहती हैं। इसके बाद आशीष अपने स्कूल के बच्चों को दिल्ली शहर घुमाने भी ले गए हैं। ताकि बच्चों को ये दिखा सकें कि पहाड़ से पढ़कर आए युवा इन शहरों में कैसे रहते हैं। स्कूल में आशीष ने कम्प्यूटर लैब शुरू की, सेमीनार करवाए और आज ये स्कूल उत्तराखंड के टॉप स्कूलों में गिना जा रहा है।


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