फ्रैंडशिप डे स्पेशल: उत्तराखंड की बेमिसाल परंपरा, सातवीं सदी से अब तक जिंदा है ये दोस्ती
Aug 5 2018 2:58PM, Writer:कपिल
दोस्ती...एक छोटा सा शब्द जरूर है लेकिन ये शब्द भाव, संवेदना और रिश्तों का अटूट बंधन है। आज पूरी दुनिया में फ्रैंडशिप डे मनाया जा रहा है लेकिन हम आपको उत्तराखंड की एक ऐसी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सातवीं सदी से मित्रता की मिसाल पेश कर रही है। उत्तराखंड के कुमाऊं में ये बेमिसाल परंपरा निभाई जाती है, जिसका नाम है ‘मिज्जू’। कहा जाता है कि कुमाऊं में चंद वंश के राजाओं ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। दो अलग अलग जातियों और समुदायों के बीच रिश्तों की डोर मजबूत करने के लिए इस परंपरा की शुरुआत की गई थी। अच्छी बात ये है कि कुमाऊं की कई जगहों में ये परंपरा आज भी जिंदा है। ‘मिज्जू’ लगाने वाले परिवारों के बीच सात पीढ़ियों तक सगे रिश्तेदारों वाला रिश्ता निभाया जाता है।
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इतिहासकार बताते हैं कि जाति और कुल के बंधनों से बाहर निकलकर दो अजनबी परिवारों के बीच मिज्जू लगाया जाता है। इससे पता चलता है कि उत्तराखंड के लोगों के दिलों में दोस्ती के लिए एक अलग जगह है। चाहे वो कमजोर वर्ग हो या फिर मजबूत वर्ग...हर कोई जाति-धर्म को अलग रखकर इस परंपरा को निभाता है। इस वक्त आप फेसबुक के जरिए देश-विदेश के लोगों को अपनी फ्रेंड लिस्ट में शामिल करते हैं, लेकिन उत्तराखंड के लोगों ने मित्रता को परंपरा का रूप दिया। फेसबुक पर दोस्ती बरकरार रहे या ना रहे लेकिन इतना तय है कि मिज्जू लगाने वाले 7 पीढ़ियों तक इस प्यारी सी परंपरा को निभाते हैं। इसकी कुछ खास बाते हैं। अलग-अलग परिवारों के बीच मित्रता के बंधन को मजबूत बनाने का जश्न मनाया जाता है।
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सबसे पहले मिज्जू लगाने वाले परिवारों में रोली और टीके की रस्म होती है। पूजा अर्चना की जाती है और दोस्ती के रिश्ते की शुरुआत होती है। इसके बाद मिज्जू लगाने वाले परिवार पूरे गांव को भोजन कराते हैं। मीट-भात का भोज हर किसी को दिया जाता है। जिस तरह पुरुषों में मिज्जू लगाया जाता है, उसी तरह से महिलाओं में संगज्यू लगाया जाता है। ये दोस्ती की वो परंपरा है, जो जिंदगी भर निभाई जाती है। ज़रा सोचिए हमारी देवभूमि किन बेमिसाल परंपराओं की धरती है। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि दोस्ती निभाना कोई उत्तराखंडियों से सीखे। आधुनिक युग में हम आगे बढ़ते जा रहे हैं लेकिन इन परंपराओं को साथ लेकर चलें तो बात ही क्या होगी। हमारी कोशिश ये ही है कि आप तक कुछ ऐसी खबरें पहुंचाएं, जिनका प्रचार और प्रसार बेहद जरूरी है।