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पहाड़ की बेमिसाल टीचर..1 छात्र वाले सरकारी स्कूल को मॉडल स्कूल बनाया, अब 20 छात्र हैं

Aug 6 2018 7:02PM, Writer:कपिल

सब कुछ संभव है..बस उस असंभव सोच को मात देने का संभव तरीका पता होना चाहिए। हैरानी होती है ये जानकर कि पहाड़ के जिस सरकारी स्कूल में कभी सिर्फ 1 छात्र था। आज उस स्कूल में 20 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे हौसलों वाले शिक्षक मौजूद हैं, ये बात जानकर भी गर्व होता है। खासतौर पर जब वो एक महिला हों तो दिल में और भी सम्मान पैदा जाता है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनी ब्लॉक से 20 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में मौजूद है ये स्कूल। जाबरी गांव के इस प्राईमेरी स्कूल की आज हर जगह चर्चा हो रही है। स्कूल में जाते ही आपको सारे छात्र साफ सुधरी ड्रेस में नज़र आएंगे। स्कूल का साफ और स्वच्छ प्रांगण आंखों को सुकून देने का काम करता है। यहां के बच्चे पढ़ाई में ही नहीं बल्कि जनरल नॉलेज और इंग्लिश के भी जानकार हैं।

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यहां दिन का भोजन डायनिंग टेबिल पर खाया जाता है। बच्चों के लिए नेम प्लेट और ड्रेस की व्यवस्था शिक्षकों की तरफ से की गई, वो भी तब जब इन्हें कई महीनों तक वेतन नहीं मिल पाता। इस स्कूल को साल 2006-07 में खोला गया था। सर्व शिक्षा अभियान के तहत खुला ये स्कूल हमेशा से ही अनदेखी का शिकार बना रहा। स्कूल का भवन स्वीकृति के बाद भी नहीं पाया था। इस वजह से यहां लगातार छात्रों की संख्या घट रही थी। साल 2009 में इस स्कूल में शिक्षिका अरूणा नौटियाल आई। उन्होंने प्रभारी प्रिंसिपल का चार्ज संभाला था। उसके बाद से ही उन्होंने अधिकारियों और नेताओं तक अपनी बात पहुंचाई। इस काम में उन्हें पांच साल बाद सफलता मिल सकी। आखिरकार 2014 में इस स्कूल को अपना भवन मिल गया। अब चुनौती ये थी कि आखिर यहां छात्रों की संख्या कैसे बढ़ाएं ?

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गांव में एक प्राइवेट स्कूल भी खुल गया था ऐसे में चुनौती और भी बड़ी थी। फिर भी अरूणा नौटियाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने पहले स्कूल को सुसज्जित कर दिया। अंग्रेजी मीडियामं से स्कूल में पढ़ाई करवानी शुरू कर दी। हर शनिवार इस स्कूल की दोनों शिक्षिकाएं बच्चों के साथ स्किल डेवलपमेंट का काम करती हैं। इस दौरान गुलदस्ते, खिलौने, पेन्टिंग समेत कई रोचक चीजें बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। छात्र-छात्राओं के लिए नेमप्लेट, ड्रेस और टाई की व्यवस्था खुद की। मेहनत रंग लाई और बहुत कम वक्त में ही इस स्कूल में 20 छात्र-छात्राएं हैं। पहाड़ के सरकारी प्राइमेरी स्कूलों के क्या हाल हैं, ये बात आप अच्छी तरह से जानते हैं। अभिभावक बदहाल स्कूलों को देखकर अपने बच्चों को इनसे दूर करने लगे हैं। ऐसे हाल में अरुणा नौटियाल की ये पहल उम्मीद जगा रही है। अरुणा नौटियाल और चन्दा रावत जैसी शिक्षिकाओं को सलाम।


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