पहाड़ में ऐसे शिक्षक भी हैं..ट्रांसफर की बात सुनकर छात्रों ने खाना छोड़ा, धरने पर गांव वाले!
Aug 9 2018 12:49PM, Writer:कपिल
पहाड़ में सरकारी प्राइमेरी स्कूलों के क्या हाल हैं ? ये बात तो आप अच्छी तरह से जानते होंगे। लेकिन कुछ सरकारी प्राइमेरी स्कूल ऐसे भी हैं, जो मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे स्कूलों में गुरु और छात्रों के बीच अटूट लगाव है। ये ही वजह है कि प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा बच्चे ऐसे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। आप कभी बागेश्वर जिले के हड़बाड़ में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बचीगांव जाइए। जबसे यहां एक शिक्षक की तैनाती हुई, तो स्कूल का पूरा माहौल ही बदल गया। बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया। इस वजह से इस स्कूल के बच्चे हिंदी और गणित के अलावा इंग्लिश में भी अच्छी पकड़ रखते हैं। शिक्षक संजय सिंह ने छात्रों के साथ अपने दोस्ताना व्यवहार से साबित किया कि शिक्षा में सबसे पहला सुधार एक अटूट रिश्ते से होता है। सब कुछ ठीक चला रहा था और इसी बीच छात्रों को एक खबर पता चली।
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स्कूल में पता चला कि शिक्षक संजय सिंह का तबादला किसी और स्कूल में हो रहा है। यहां छात्र इस बात से इतने निराश हो गए हैं कि ढंग से खा-पी भी नही रहे। बच्चों के माता-पिता भी बेचैन हो गए हैं। बताया जा रहा है कि परेशान अभिभावकों ने शिक्षक का तबादला रोकने के लिए कलेक्ट्रेट में भी प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शिक्षक का तबादला नहीं रोका गया, तो वो धरने पर बैठ जाएंगे। छोटे-छोटे स्कूली बच्चे कह रहे हैं कि अगर ‘हमारे गुरुजी इस स्कूल से गए तो हम भी स्कूल छोड़ देंगे’। कभी जिस स्कूल में माता-पिता अपने बच्चों को भेजना तक पसंद नहीं करते थे, आज उसी स्कूल की सूरत संवारकर शिक्षक संजय सिंह ने सभी के दिल में अलग जगह बना दी। अभिभावकों का कहना है कि इस शिक्षक के आने से हमारे बच्चों का सुनहरा भविष्य तैयार हो रहा था।
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दरअसल इस प्राथमिक विद्यालय में जबसे शिक्षक संजय सिंह आए तबसे शिक्षा के स्तर में जबरदस्त सुधार देखने को मिला। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी इस स्कूल की तरफ आने लगे थे। आलम ये है कि दूर-दूर से भी छात्र यहां पढ़ने आ रहे थे। अचानक उसी शिक्षक के तबादले के आदेश जारी हुए तो सभी बैचेन हो गए। धन्य हैं ऐसे शिक्षक, जो पहाड़ों में रहकर शिक्षा के स्तर को सुधारने में लगे हैं। ऐसे शिक्षक जानते हैं कि एक कोशिश भी मददगार साबित हो सकती है। सलाम ऐसे शिक्षकों को जो वास्तव में अपना धर्म निभा रहे हैं।