देवभूमि के नंदादेवी पर्वत का राज़ खुलेगा, 53 साल बाद बड़े रहस्य से पर्दा हटाएगा हॉलीवुड
Aug 11 2018 10:42AM, Writer:कपिल
देवभूमि के नंदादेवी पर्वत शिखर का एक राज़, जो अभी तक दुनिया से छुपाया गया था। वो राज़ अब खुलने जा रहा है। ये राज़ साल 1965 और 1967 के दौर का है। ये कहानी खतरनाक प्लूटोनियम डिवाइस की है, जो 1965 से नंदादेवी पर्वत पर ही दबा है। इस प्लूटोनियम पैक को लेकर दो बार देश की संसंद में सवाल किए गए थे लेकिन तत्कालीन सरकार की तरफ से कोई भी जवाब नहीं मिला। पहले आपको इसके बारे में बता देते हैं। दरअसल साल 1964 में चीन ने अपना पहला न्यूक्लियर टेस्ट किया था। इस न्यक्लियर टेस्ट की क्षमता का पता लगाने के लिए तत्कालीन सरकार ने 1965 में नंदादेवी पर कुछ खतरनाक प्लूटोनियम डिवाइस लगाए थे। इसके लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की मदद ली गई थी। लेकिन इस दौरान कुछ अजीब सी घटना हुई।
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इसी दौरान यहं एक बर्फीला तूफान आया था। इस बर्फीले तूफान में वो सारे खतरनाक प्लूटोनियम डिवास दब गए थे। साल 1967 में यहां एक और प्लूटोनियम पैक लाया गया था लेकिन पहले वाला डिवाइस अभी तक बर्फ में दफन है। हाल ही में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस बारे में पीएम मोदी से मुलाकात की थी। सतपाल महाराज का कहना था कि ये प्लूटोनियम डिवाइस कभी भी रेडिएशन लीक कर सकते हैं। तब से ये मसला एक बार फिर चर्चाओं में हैं। खास बात ये है कि अब हॉलीवुड नंदा देवी पर्वत के इस राज की तरफ आकर्षित हुआ है। हॉलीवुड नंदा देवी के प्लूटोनियम पैक की कहानी को दुनिया को दिखाएगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि हॉलीवुड डायरेक्टर ग्रेग मैक्लेन इस फिल्म को बना रहे हैं। खबर तो ये भी है कि रणबीर कपूर इस फिल्म में मुख्य किरदार निभा सकते हैं।
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पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि प्लूटोनियम पैक की वजह से रेडिएशन लीक हो सकता है। खास बात ये है कि इस ग्लेशियर का पानी गंगा नदी में मिलता है। ऐसे में गहन जांच कर ये तय किया जाना चाहिए कि क्या इससे कोई गंभीर नुकसान तो नहीं होगा ? उनका कहना है कि अगर इस मुद्दे पर फिल्म बनती है कि इससे बड़ी जागरूकता की बात कुछ भी नहीं होगी। इसके साथ ही ये पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण होगी। कैबिनेट मंत्री महाराज ने कहा कि फिल्म निर्माताओं से आग्रह किया जाएगा कि वह इसमें नंदा देवी की लोकेशन को ही दिखाएं। इससे लोग जागरूक तो होंगे ही, नंदादेवी ग्लेशियर के बारे में पूरी जानकारी दुनिया में जाएगी, जिससे पर्यटन के दरवाजे भी खुलेंगे। सवाल ये भी तो है कि आखिर ये राज इतने सालों से छुपाया क्यों गया ?