image: Pradeep singh rawat uttarakhand martyr

उत्तराखंड का सपूत शहीद..शादी को हुए थे डेढ़ साल, राखी से पहले 3 बहनों को छोड़कर चला गया

Aug 13 2018 12:45PM, Writer:कपिल

कितनी कुर्बानियां और कितनी शहादत ? लिख दीजिए उत्तराखँड के वीरों की शहादत पर कोई किताब..हर किताब कम पड़ेगी। जवानों के शहीद होने का सिलसिला लगातार बरकरार है। बीते कुछ ही दिनों में देवभूमि के 10 से ज्यादा जवान देश के लिए कुर्बान हो गए है। एक और वीर सपूत देश के लिए कुर्बान हो गया है। कुर्बानियों का सिलसिला लगातार बरकरार है और इस बीच एक और दुख भरी खबर सामने आई है। टिहरी गढ़वाल के दोगी पट्टी के बमुंड गांव के प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। प्रदीप अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन में तैनात ये जवान अपने दोस्तों के बीच फाइटर नाम से जाना जाता था। बताया जा रहा है कि प्रदीप सिंह रावत की शादी डेढ़ साल पहले ही हुई थी। अगले साल जनवरी में उनकी मैरिज एनिवर्सरी थी और वो इसके लिए घर आने वाले थे।

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रक्षाबंधन नजदीक आने वाला है और दुख की बात तो ये है कि प्रदीप सिंह रावत तीन बहनों के अकेले भाई थे। हर साल अपनी बहनों की रक्षा की वादा करने वाले प्रदीप देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए और हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गए। इस बार ये तीन बहनें किसकी कलाई में राखी बांधेंगी ? तीनों बहनों को जब इस बात का पता चला तो उनका रो-रोकर बुरा हाल है। 26 अगस्त को रक्षाबंधन है और इससे ठीक 13 दिन पहले तीन बहनों को ये दुख भरी खबर मिली। खबर है कि प्रदीप सिंह रावत चौथी गढ़वाल राइफल में तैनात थे और इस वक्त जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में ड्यूटी पर थे। बताया जा रहा है कि प्रदीप सिंह रावत पेट्रोलिंग पर थे। इस दौरन एक बारूदी सुरंग फट गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया।

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अस्पताल में इलाज के दौरान ही इस वीर सपूत ने अपनी जान गंवा दी। बचपन में प्रदीप सिंह रावत अपने पिता को वर्दी में देखते थे, तो उनके दिल में देश के लिए और भी ज्यादा प्यार और सम्मान उमड़ता था। उनके पिता कुंवर सिंह रावत भी सेना में ही थे। फिलहाल उनका परिवार अपर गंगानगर ऋषिकेश में रह रहा था। परिवार में पत्नी को जब इस बात का पता चला, तो वो सुध बुध गंवा बैठी। सेना के कमांडिंग ऑफिसर ने प्रदीप सिंह रावत के चाचा वीर सिंह रावत को शहादत की खबर दी। कुछ महीने बाद जनवरी में वो घर आने वाले थे। अपने लाल की शहादत की खबर सुनकर हर कोई हैरान है। परिवार बिलख रहा है और अपने लाल की कुर्बानी पर गर्व कर रहा है। हाल ही में उत्तराखँड के करीब 10 से ज्यादा जवानों ने कुर्बानी दी है। सवाल ये ही है कि आखिर कब तक ?


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