खुशखबरी: 'युसेक' ने लगायी 'सच की मुहर'... गढ़वाल के विद्वान ने ही लिखी है बदरीनाथ आरती
Aug 18 2018 1:55PM, Writer:शैलेश
उत्तराखंड के लिए बदरीनाथ धाम से हम आज की सबसे ऐतिहासिक खबर लाये हैं। यूसैक यानि कि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने बद्रीनाथ आरती की पाण्डुलिपि पर सत्यता की मुहर लगा दी है। राज्य समीक्षा ने बद्रीनाथ आरती के असली रचयिता के बारे में इससे पहले आपको बताया था कि विश्वप्रसिद्ध 'पवन मंद सुगंध शीतल' आरती किसी और ने नहीं बल्कि रुद्रप्रयाग जिले में तल्ला नागपुर पट्टी के सतेरा स्यूपुरी के विजरवाणा के रहने वाले स्वर्गीय ठाकुर धनसिंह बर्त्वाल ने लिखी है। खुशखबरी ये भी कि अब बदरीनाथ आरती के असल रचयिता श्री बर्त्वाल के घर को म्यूजियम के रूप में उत्तराखंड सरकार द्वारा विकसित किया जाएगा। राज्य समीक्षा की पहल के बाद सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद आरती पर बहस शुरू हुई, युसेक ने पांडुलिपियों की जांच की और इसकी इतिश्री सत्य की विजय के साथ हुई। युसेक ने अपनी जांच के बाद बद्रीनाथ जी की आरती की पांडुलिपियों को सही पाया है। जांच में ये भी पाया गया कि बद्रीनाथ जी की आरती 137 साल पहले रुद्रप्रयाग जिले में तल्ला नागपुर पट्टी के सतेरा स्यूपुरी के विजरवाणा के रहने वाले स्वर्गीय ठाकुर धनसिंह बर्त्वाल ने ही लिखी है। आगे कुछ और ख़ास बातें भी हैं...
यह भी पढें - बदरीनाथ की आरती मौलाना बदरुद्दीन ने नहीं लिखी..बल्कि पहाड़ के एक विद्वान ने लिखी थी

कल यानि कि 19 अगस्त को यूसैक के निदेशक एमपीएस बिष्ट और उत्तराखंड पर्यटन के सचिव दिलीप जावलकर की मौजूदगी में बदरी-केदार मंदिर समिति इस पांडुलिपि का आधिकारिक अधिग्रहण करेगी। बदरी-केदार मंदिर समिति अब इस पांडुलिपि को बदरीनाथ धाम में सुरक्षित रखेगी। भारत वर्ष के प्रसिद्ध चारधामों में से एक बदरीनाथ धाम में हर रोज गाई जाने आरती के रचयिता को लेकर यूसैक की जांच के बाद सच अब सबके सामने है। यूसैक ने रुद्रप्रयाग जिले के तल्ला नागपुर पट्टी के सतेरा स्यूपुरी के विजरवाणा के रहने वाले महेंद्र सिंह बर्त्वाल के दावे को सही माना है। महेंद्र का कहना था कि उनके परदादा स्वर्गीय धनसिंह बर्त्वाल ने इस आरती को 137 साल पहले लिखा था। उन्होंने आरती की पाण्डुलिपि उनके पास सुरक्षित होने और इस पाण्डुलिपि के सत्य होने का दावा किया था। अभी तक ये माना जाता था कि बदरीनाथ जी की आरती नंदप्रयाग के बदरूदीन ने लिखी है। मंदिर समिति ने बदरूदीन के परिवार से भी सबूत मांगा था जहां से किसी भी प्रकार का प्रमाण नहीं मिला।
यह भी पढें - बदरीनाथ की आरती का राज़ खुलेगा, किसी मौलाना ने नहीं बल्कि एक पहाड़ी ने लिखी ये आरती
पाठकों को बताना चाहेंगे कि राज्य समीक्षा को ये जानकारी गुप्तकाशी के आचार्य कृष्णानन्द नौटियाल से मिली। इसके बाद श्री नौटियाल ने राज्य समीक्षा टीम के साथ बदरीनाथ धाम की इस विश्वप्रसिद्ध आरती की महेंद्र सिंह बर्त्वाल से मिली हुई पाण्डुलिपि का अध्ययन किया। पता लगा कि इस पाण्डुलिपि की मुख्य विशेषता ये है कि वर्तमान आरती का प्रथम पद यानी ''पवन मंद सुगन्ध शीतल" इस आरती का पांचवा पद है। वर्तमान आरती से ये आरती 5 पद ज्यादा है। गजब की बात तो ये भी है कि इस पाण्डुलिपि के पहले 5 पद वर्तमान आरती में नहीँ हैं। इसी तरह वर्तमान आरती और पाण्डुलिपि के पदों में जहां समानता है, वहीं पद संयोजन में भी भिन्नता है। पाण्डुलिपि में गढ़वाली भाषा के शब्दों का प्रयोग भी है। जैसे कौतुक के स्थान पर कौथिग, पवन के स्थान पर पौन और सिद्ध मुनिजन के स्थान पर सकल मुनिजन अंकित है। ये पाण्डुलिपि एक ही पत्र पर आगे पीछे लिखी गयी है। भगवान नारायण की आरती के कुल 11 पदों के बाद चार धाम की आरती भी है।
यह भी पढें - बदरीनाथ में इस वजह से शंख नहीं बजता, देवभूमि की मां कूष्मांडा से जुड़ा है ये सच!
आरती के अंत में रचयिता के द्वारा भगवान से कल्याण की प्रार्थना की गयी है। यहीं पर आरती के लिखने की तिथि और लिखने वाले का नाम पता भी लिखा है। स्व0 ठाकुर धनसिंह बर्त्वाल जी थाती सतेरा के धर्मपरायण मालगुजार थे। इनके द्वारा लिखी गयी बदरी नाथ जी की आरती की 2 पांडुलिपियां आज भी उनके पड़पोते महेंद्र सिंह बर्त्वाल जी के पास सहेज कर रखी गई हैं। युसेक की मुहर के बाद अब ये सच सबके सामने है... अब गर्व से कहिये कि बदरीनाथ जी की आरती किसी और ने नहीं बल्कि गढ़वाल के ही एक प्रकांड विद्वान ने लिखी है। जय उत्तराखंड। जय बदरी विशाल।