image: parvej ahmad saved geetanjali of gairsain

रक्षाबंधन पर पहाड़ की बेटी को परवेज़ अहमद ने बचाया, भाई बनकर फर्ज निभाया

Aug 27 2018 3:11PM, Writer:कपिल

देशभर में हिंदू और मुस्लिम को लेकर अलग ही बहस चल रही है। लेकिन जब बात एक बेटी की हो, जो इंटेसिव केयर यूनिट में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ हो। तो धर्म और जाति को एक तरफ रखकर उस बेटी को बचाना सबसे पहला काम है। चमोली जिले के गैरसैंण की रहने वाली गीतांजलि के लिए एक एक सेंकड कीमती था। परेशान पिता उस बेटी को श्रीनगर गढ़वाल के बेस अस्पताल ले आए। तीन महीने पहले ही गीतांजलि को पीलिया हो गया था और तबसे लेकर अबतक वो तड़प रही थी। हैरानी की बात ये है कि अब तक उसे किसी भी तरह की मदद भी नहीं मिली थी। आखिरकार थक हार कर पिता कलम सिंह ने सामाजिक कार्यकर्ता रमेश आर्य से बातचीत की और 21 अगस्त को गीतांजलि को श्रीनगर के बेस अस्पताल ले आए।

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रविवार की सुबह डॉक्टर्स ने कहा कि गीतांजलि के शरीर में दो यूनिट खून चढ़ाना बेहद जरूरी है। खून भी एबी पॉजिटिव ग्रुप का चाहिए था। परिजन अब गीतांजलि के लिए खून की तलाश में भटकने लगे थे। इस बीच सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अपील की गई। तभी गोला बाजार के रहने वाले परवेज अहमद को इस बात का पता चला और वो सबसे पहले बेस अस्पताल पहुंच गए। उन्हें पता था कि गीतांजलि की जिंदगी सबसे ज्यादा जरूरी है। परवेज सीने रक्तदान किया और थोड़ी ही देर बाद तीन और युवक सूरज नेगी, शिवशंकर रतूड़ी और अनिल कुमार ने भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भी गीतांजलि की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान किया। परवेज और तीन अन्य युवकों ने जब रक्तदान किया तो परिजनों की आंखें भर आई।

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उन्होंने खुले दिल से सभी की तारीफ की। वास्तव में इस काम की तारीफ होनी चाहिए। पहाड़ की एक बेटी के लिए हर सेंकड कीमती था। रक्षाबंधन पर अनजान भाइयों की तरफ से गीतांजलि के लिए इससे बड़ा तोहफा क्या होगा। परवेज अक्सर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं। समाज में प्यार बढ़ाइए। दुश्मनी और वैमनस्य से कुछ भी हासिल नहीं होता। परवेज अहमद की ये फेसबुक पोस्ट जरूर देखिए।

बेस हॉस्पिटल श्रीकोट के आईसीयू में एडमिट गैरसेंण निवासी बहन 'गीतांजलि' को रक्तदान किया।

भला इससे बेहतर 'रक्षा बंधन' क्या होगा।। #रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई।

Posted by Parvez Ahmad on Sunday, August 26, 2018


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