उत्तराखंड में आपदा पीड़ितों से शर्मनाक मज़ाक..150-150 रुपये के चेक बांटे गए!
Aug 30 2018 10:33AM, Writer:कपिल
वादे बड़े बड़़े और राहत के नाम पर मज़ाक। आपदा में किसी ने अपना घर खो दिया, किसी ने परिवार खो दिया, किसी ने जमीन खो दी तो किसी की रोजी-रोटी छिन गई। इस सब की कीमत है सिर्फ 150 रुपये। हाल ही में जोशीमठ के चाई गांव में भयंकर बारिश और अतिवृष्टि से कोहराम मच गया था। जून महीने में मौसम के कहर से चांई गांव में गौशाला, खेत और सड़क बह गए। भारी बारिश की वजह से पहाड़ों से बड़े-बड़े बोल्डर आकर गांव में कहर बरपाते रहे। चांई गांव के नोखड़ी तोक में चार मकान, तीन गौशाला और कुछ मवेशी मलबे में दब गए। प्रशासन ने इस नुक़सान की भरपाई के लिए ग्रामीणों को 112 रुपये, 150 रुपये और 187 रुपये के चेक बांटे हैं। स्थानीय लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वो ऐसे चेक का करें क्या ? यकीन नहीं होता तो ये तस्वीरें देख लीजिए।
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हालत तो ये है कि बैंक तक जाने और वापस आने में ही उनके सौ रुपये से ज़्यादा खर्च हो जाएंगे। ऐसे में चेक को बैंक तक ना ले जाना ही उनके लिए बेहतर है। चांई गांव के ग्रामप्रधान रघुवर सिंह भी इन्हीं पीड़ितों में से एक हैं। रघुवर सिंह को मुआवजे के तौर पर सरकार से 112.50 रुपये का चेक मिला। प्रशासन की ओर से गांव के 94 परिवारों को उनके घर और ज़मीन के नुक़सान के मुआवज़े के रूप में 70,125 रुपये के चेक बांटे गए थे।

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इनमें से 60 से ज्यादा चेक ऐसे हैं जो 100 और 1000 रुपये के बीच हैं। मुआवज़े में ऐसी मामूली क़ीमत के चेक मिले तो गांव वालों ने स्थानीय विधायक के खिलाफ नाराज़गी जताई। उधर विधायक महेंद्र भट्ट ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मुआवज़े की राशि मानकों के हिसाब से ही बांटी गई है। ये कितना शर्मनाक मज़ाक है उन आपदा पीड़ितों से, जिन्होंने अपना बहुत कुछ खो दिया और उसकी कीमत महज़ 100 से 150 के बीच है।