उत्तराखंड में अलर्ट..टिहरी, बागेश्वर के बाद चमोली में मची तबाही..जिंदा दफन हुए दो लोग
Aug 30 2018 12:56PM, Writer:आदिशा
पहले टिहरी जिले का कोट गांव, फिर बागेश्वर का कपकोट और अब चमोली का फरखेत गांव। उत्तराखंड में इस वक्त तबाही का आलम है। बारिश ने जगह-जगह विकराल रूप धारण कर दिया है। कल ही टिहरी और बागेश्वर जिलों में बादल फटने की खबरें आई थी। टिहरी में बादल फटने से 7 लोग मलबे में जिंदा दफन हो गए, तो बागेश्वर में बादल फटने से सरयू नदी रौद्र रूप दिखा रही है। अब खबर आ रही है कि चमोली जिले में भी तबाही मच गई है। बुधवार देर रात चमोली जिले के फरखेत गांव मेंं जबरदस्त भूस्खलन आ गया। बताया जा रहा है इस भूस्खलन में दो सगे भाई मलबे में ज़िंदा दफन हो गए। अचानक हुए भूस्खलन के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था और पूरे क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई। इस वजह से अपने घर में सो रहे गब्बर लाल और शब्बर लाल की मौत हो गई।
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मौके पर मौजूद एक शख्स ने भागकर अपनी जान बचाई हालांकि वो भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। तहसीलदार सोहन सिंह रांगण मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए। हादसे के बाद दोनों भाईयों के शवों को बरामद कर लिया गया है।

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इससे पहले कल ही टिहरी जिलेे के कोट गांव में बादल फट गया। इस भीषण तबाही में एक परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। उधर बागेश्वर में तो हाहाकार ही मचा है। कपकोट गांव में बादल फटने से सरजू नदी उफान पर है। सरयू नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। बादल फटने की वजह से सड़कों पर भारी भूस्खलन हो रहा है। अकेले बागेश्वर जिले में एक दर्जन से ज्यादा मार्ग बंद हो गए हैं। उत्तराखंड में विभिन्न मार्गों पर भूगर्भीय दृष्टि से 43 बेहद संवेदनशील भूस्खलन जोन लोक चिह्नित किए गए हैं। निर्माण विभाग द्वारा इन जगहों को चिह्नित किया गया है। खास बात ये भी है कि चार सौ से ज्यादा गांव भूस्खलन की दृष्टि से खासे संवेदनशील माने गए हैं। इस बार हो रही बारिश से ना सिर्फ नए भूस्खलन जोन सामने आ रहे है, बल्कि गांवों के लिए भी खतरा बढ़ा है। जाहिर है कि इससे प्रशासन भी चिंतित हो सकता है।