पहाड़ के कोट गांव की बबली अकेली रह गई, आपदा में परिवार के 7 लोगों को खो दिया
Aug 30 2018 5:36PM, Writer:कपिल
पहाड़ से भयंकर भूस्खलन, आंखों के आगे नाचती मौत और सामने एक पत्थर की ओट में छुपी 14 साल की बबली। कुदरत ने इस बेटी का भाग्य ना जाने किस क्रूर कलम से लिखा था। अपनी आंखों से सामने अपने माता-पिता, चाचा-चाची और भाई-बहनों को चीख पुकार मचाता देखकर बबली के दिल में ना जाने क्या बीती होगी। पल भर में ही पूरा परिवार आंखों के आगे से ओझल हो गया और जिंदा बची सिर्फ बबली। टिहरी के कोट गांव में भूस्खलन के बाद हाहाकार मच गया। परिवार के सभी लोग इस मलबे में दफन हो गए। इसी मलबे से जिंदा निकाली गई है बबली। बबली रजाई में लिपटी थी और उसकी सांसें चल रही थी। होश आने पर बबली ने बताया कि सुबह जब उसकी आंख खुली तो उसने खुद को पत्थरों से बनी बनी गुफा जैसी जगह पर पाया।

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बबली शोर मचाने लग गई और मदद के लिए शोर मचाने लगी। बबली राजकीय इंटर कालेज कोट विशन में कक्षा 6 में पढ़ती है। सहमी हुई सी बबली किसी से बातचीत करने से भी डर रही है। गांव की महिलाएं उस मासूम को हिम्मत बंधा रही हैं। इस दुख भरी घटना के बाद गांव के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। उस मलबे से बबली के परिजनों के चार शव निकाल दिए गए हैं और बाकियों के भी जीवित होने की कोई उम्मीद नहीं बची है।

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हम चाहते हैं कि आप दिल से इस बेटी के लिए दुआ करें। इस बेटी के दुख में शामिल होने की कोशिश कीजिए। उस बेटी के लिए प्रार्थना कीजिए, जो भयानक आपदा में अपने पूरे परिवार को ही खो चुकी है। बबली इस वक्त दर्द के जिस दौर से गुज़र रही है शायद उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। कोट गांव की महिलाओं की आंखों से लगातार आंसू बह रहे हैं।