उत्तराखंड की बेटी से चलती बस में छेड़छाड़, दिल्ली के रास्ते में हुआ शर्मनाक कांड!
Aug 30 2018 8:19PM, Writer:कपिल
लीजिए..सुरक्षा के एक और दावे का सच हम आपको बता रहे हैं। उत्तराखंड के गांव, सड़क, गली, मोहल्ले, शहर और यहां तक बसें भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। विकृत मानसिकता ने हैवानों का दिमाग खराब कर दिया है। उन्हें सरेआम, सरेराह बेटियों से छेड़छाड़ करने में डर नहीं लगता। आज हम आपको जो वारदात बताने जा रहे हैं, उसके बारे में जानकर और पढ़कर आपका दिमाग भी फटेगा। उत्तराखंड परिवहन की चलती बस में एक बेटी से छेड़छाड़ हो रही थी, वो बार बार इसका विरोध करती रही लेकिन इसके बाद भी वो बेशर्म नहीं रुके। हैरानी तो तब और भी ज्यादा हो जाती है कि वो बेटी IAS की तैयारी कर रही है। एक वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक उत्तराखंड परिवहन की बस मंगलवार रात पिथौरागढ़ डिपो से आनन्द विहार की ओर जा रही थी।
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इसी बस में हल्द्वानी की एक युवती भी बैठी थी। युवती के साथ वाली सीट में एक युवक बैठा था। यात्रा के दौरान युवती को नींद आई तो बगल में बैठे उस लड़के के दिमाग में हैवान सवार हो गया। उसने सोती हुई लड़की से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया। इसके बाद लड़की नींद से जागी और उसे इस बात का अहसास हुआ। लड़की ने इस बात की शिकायत बस कंडक्टर से की। यूं तो बस कंडक्टर को तुरंत ही उस लड़के को बस से बाहर कर देना चाहिए था। लेकिन उसने युवती को बस के आगे के हिस्से में ड्राइवर के पास बैठने के लिए कहा। उस युवती को लगा कि अब वो सुरक्षित है लेकिन ऐसा नहीं था। बस के ड्राइवर की गंदी नजर उस पर आ गई। ड्राइवर ने रात में बस की लाइट बंद कर दी। अब वो आरोपी लड़का भी बस के अगले हिस्से में आ गया और ड्राइवर के साथ मिलकर उस लड़की के साथ छेड़छाड़ करने लगा।
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अब तो युवती ने भरी बस में हल्ला मचाना शुरू कर दिया। तब जाकर बाकी यात्रियों ने बस ड्राइवर और आरोपी शख्स को दबोचा। खूब पिटाई की और तुरत 100 नंबर पर फोन किया और पुलिस ने नेशनल हाईवे-9 के बाबूगढ़ क्षेत्र में बस को रोक लिया। आरोपी बस ड्राइवर का नाम राम अवतार और आरोपी यात्री का मान सिंह है। बस को पुलिस ने जब्त कर लिया और दो घंटे के बाद दूसरी बस से यात्रियों को रवाना किया। ज़रा सोचिए कि समाज की मानसिकता कितनी खराब हो गई है। ये वो तथाकथित सभ्य समाज है, जहां बस में अकेले सफर करना किसी बेटी के लिए खतरा बन गया है। ये वो ही समाज है जहां बेटियां अपनों का ही शिकार होने लगी हैं। रक्षाबंधन पर हर कोई बेटियों की रक्षा की कसम लेते हैं, राखी बंधवाते हैं और फिर सारे वादे फुर्र हो जाते हैं। ऐसे लोगों के बढ़ावा देने वाले वो लोग भी हैं, जो चुपचाप ऐसी हरकतों को देखते रहते हैं।