देवभूमि में रेप पीड़ित को गांव से निकालने का फतवा..परिवार को जिंदा जलाने की धमकी!
Aug 31 2018 3:49PM, Writer:कपिल
इसी साल अप्रैल की बात की है। उत्तराखंड के लक्सर में एक दबंग परिवार के लड़के ने नाबालिक बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। कुछ दिन पहले जब बच्ची की तबीयत बिगड़ी तो पता चला वो गर्भवती हो गई। इसके बाद गांव वालों ने बेहद ही शर्मनाक हरकत की गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में आरोपी शख्स भी था और उसने पीड़िता के साथ शादी करने से इंकार कर दिया। उस दरिंदे को सजा देने बजाय पंचायत ने पीड़ित परिवार को ही धमकी दे डाली। पीड़ित परिवार के खिलाफ फरमान जारी किया कि अगर उन्होंने इस मामले में शिकायत की, तो गांव से बाहर निकाल दिया जाएगा। देशभर में इस मामले की भर्त्सना की जा रही है कि आखिर गांव की एक पंचायत का ये कैसा फैसला है। 15 साल की लड़की के पिता ने हरिद्वार के एसएसपी से शिकायत की थी।
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पुलिस के पास शिकायत में कहा था कि ‘’गांववालों ने हाल ही में धमकी दी थी कि अगर पुलिस में रेप का केस दर्ज कराया, तो पूरे परिवार को जिंदा जला दिया जाएगा। पिता का आरोप है कि उनकी लड़की के साथ अप्रैल में रेप हुआ था और इसके बाद वो गर्भवती हो गई। रेप की शिकार लड़की के पिता का कहना है कि जब उन्होंने गांव के प्रधान से बलात्कार के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा, तो 27 अगस्त को करीब 20 लोग मेरे घर पर आकर हमें धमकाने लगे। पीड़ित पिता का कहना है, 'उन लोगों ने मेरी बेटी का गर्भपात कराने का दबाव डाला और किसी तरह की कानूनी कार्रवाई न करने की धमकी दी।' मामला नैनीताल हाईकोर्ट में पहुंचा तो हाईकोर्ट में ऐतिहासिक फैसला सुना दिया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीड़िता से सहानुभूति दिखाने की बजाय पंचायत ने परिवार को गांव से बाहर निकालने का आदेश कैसे दे दिया ? कोर्ट ने कहा है कि पीड़ित परिवार को तुरंत सुरक्षा प्रदान की जाए। फतवे को गैर कानूनी करार देते हुए कोर्ट ने उत्तराखंड में जारी होने वाले सभी फतवों को असंवैधानिक बताया है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में बताया कि उत्तराखंड में किसी भी धार्मिक संगठन, पचायत या फिर किसी भी समूह को फतवे जारी करने की अनुमति नहीं है। ये मौलिक अधिकारों, गरिमा, दर्जा, सम्मान और व्यक्तियों के दायित्वों का साफ तौर पर उल्लंघन है। एक अखबार में छपी खबर के आधार पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी तरह का फतवा कानून की भावना के खिलाफ है। आखिरकार रेप पीड़ित परिवार को कोर्ट से बड़ी राहत मिली।